विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाले लोग, महुआ मोइत्रा पर भड़कीं TMC की बागी सांसद काकोली घोष

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टीएमसी के अंदर की कलह अब सबके सामने आ गई है। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा को निशाना बनाते हुए कहा कि विदेश में  बैठकर ट्वीट करने वाले लोग केवल अपनी पब्लिसिटी के लिए काम करते हैं। 

विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाले लोग, महुआ मोइत्रा पर भड़कीं TMC की बागी सांसद काकोली घोष

तृणमूल कांग्रेस के अंदर की कलह अब धीरे-धीरे सबके सामने आने लगी है। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष ने एक-एक करके ममता बनर्जी के कई वफादारों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कहा कि महुआ मोइत्रा तो कोई राजनेता ही नहीं हैं। जब ममता बनर्जी राजनीति में आई थीं तो महुआ मोइत्रा जैसे लोगों को कहीं अता-पता ही नहीं था और आज वह उनकी बहुत खास बनती हैं। एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 1976 में जब ममता बनर्जी राजनीति में उतरीं तो इन लोगों में से कोई आसपास भी नहीं था। मुझे लगता है कि विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाली महिला का तब जन्म भी नहीं हुआ होगा। वह ना तो कल राजनेता थीं और ना ही आज हैं। महुआ मोइत्रा ने एक दिन पहल ही बागी सांसदों को निशाना बनाते हुए उन्हें गद्दार और लालची बताया था।

बता दें कि काकोली घोष ने भी टीएमसी के सांसदों के बीच चल रहे मतभेद को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को दिए पत्र में हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, जिनको ममता बनर्जी का पुराना साथी कहा जा रहा है वे केवल अपनी पब्लिसिटी के लिए काम करते हैं। वे ऐसे बयान देते हैं जिससे की मीडिया कवर करें और वे पॉपुलर हो जाएं।

20 सांसदों का समर्थन

घोष ने दावा किया कि बागी गुट के पास 20 सांसदों का समर्थन है और वह खुद ही गुट का हिस्सा हैं। जानकारी के मुताबिक बागी सांसदों ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की है। वहीं ममता बनर्जी विपक्षी एकता मजबूत करने के लिए दिल्ली पहुंची हैं। सोमवार को उन्होंने इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया। उधर टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पार्टी के संसदीय दल में बढ़ते असंतोष की अटकलों को और बल मिला है तथा संगठन पर ममता बनर्जी की पकड़ को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

भूपेंद्र यादव से मिले सुखेंदु शेखर

रॉय कई तृणमूल सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पहुंचे। बताया जाता है कि यह बैठक राष्ट्रीय राजधानी स्थित यादव के आवास पर हुई, जो उस स्थान से अधिक दूर नहीं है जहां ममता बनर्जी आगामी मानसून सत्र से पहले साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से विपक्षी नेताओं के साथ बैठक कर रही थीं। बैठक में तृणमूल के कई लोकसभा सांसद शामिल थे। इनमें प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालिपद सोरेन और असित कुमार माल के नाम सामने आये हैं। कुछ रिपोर्टों में मथुरापुर के सांसद बापी हलदार की मौजूदगी का भी दावा किया गया है।

दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम से पहले पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के भीतर अभूतपूर्व उथल-पुथल देखने को मिली थी। रिपोर्टों के अनुसार विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल विधायकों का एक बड़ा वर्ग पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाता दिखाई दिया। बागी खेमे का दावा है कि तृणमूल के टिकट पर निर्वाचित 80 विधायकों में से 60 ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया। इसके बाद इस समूह ने स्वयं को "वास्तविक तृणमूल" बताया और कथित तौर पर ममता बनर्जी को "मुख्य सलाहकार" की भूमिका सौंपने की घोषणा की। इसे पार्टी की स्थापना के बाद से ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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