जैसा बाप, वैसी बेटी; मेधा रूपम पर महुआ मोइत्रा का तीखा हमला, CEC ज्ञानेश कुमार को भी लपेटा
इससे पहले हाईकोर्ट ने मेधा रूपम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नौकरशाही का तानाशाही भरा रवैया उत्तर प्रदेश को एक ऐसे दमनकारी समाज में बदल सकता है जहां हर चीज पर कड़ी निगरानी हो। महुआ मोइत्रा को मौका मिल गया।

नोएडा की DM मेधा रूपम को हाईकोर्ट से मिली फटकार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस सांसद मेधा रूपम ने उन पर तीखा हमला बोला है। इस दौरान उन्होंने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी नाम लिया। महुआ मोइत्रा ने आकृति चौधरी की हिरासत का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मेधा रूपम CEC ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं और दोनों एक जैसे ही हैं। महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में लिखा, “जैसा शर्मनाक पिता, वैसी ही शर्मनाक बेटी। यह लोकतंत्र और कानून दोनों के लिए कलंक है। नोएडा की डीएम मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। हमें भारत को इस अभिशाप से मुक्त करना होगा।”
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा 24 वर्षीय आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तारी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ DM मेधा रूपम को भी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जल्दबाजी में हिरासत का आदेश पारित करने के फैसले को लेकर भी नाराजगी जताई थी। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि NSA के तहत आकृति चौधरी को लगातार जेल में रखा गया। यह अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि हिरासत के आधार के कोई ठोस सबूत हैं ही नहीं।
5 लाख मुआवजा देने का आदेश
इसके साथ ही कोर्ट ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये मुआवजा भी देने का निर्देश दिया। यह रकम मेधा रूपम और एसएचओ स्तर तक के अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूले जाने का आदेश है। अदालत ने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस वजह या उचित प्रक्रिया के नागरिक स्वतंत्रताओं का उल्लंघन करने वाली ज्यादतियों या गैर कानूनी कार्यों को सुधारते समय, न्यायपालिका पीड़ित नागरिकों को मुआवजा दिलाने के लिए कड़े आदेश दे सकती है। पीठ ने चेतावनी भी दी कि मनमानी करने वाली नौकरशाही का लगातार तानाशाही भरा रवैया उत्तर प्रदेश को एक ऐसे दमनकारी समाज में बदल सकता है जहां हर चीज पर कड़ी निगरानी हो।
क्या है पूरा मामला?
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बीच गिरफ्तार किया गया था। राज्य सरकार ने 13 मई को आकृति चौधरी और पत्रकार सत्य वर्मा के खिलाफ NSA लगा दिया था। हालांकि कोर्ट ने 2 सितंबर को अपने 15 पन्नों के आदेश में कहा कि अधिकारियों को बहुत अधिकार जरूर दिए जाते हैं लेकिन अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी निष्ठा संविधान के प्रति है ना कि नेताओं के प्रति। आदेश में यह भी कहा गया कि अधिकारी जनता के सेवक होते हैं और लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है।
अदालत ने चेतावनी दी कि जब नौकरशाह और पुलिस अधिकारी अपनी शपथ को नजरअंदाज करते हैं और उसके उलट काम करते हैं तो लोग उन्हें ब्रिटिश शासन की दमनकारी निशानी के तौर पर देख सकते हैं जिससे नागरिकों में अशांति का माहौल बन सकता है। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में पुलिस रिपोर्ट में बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोप लगाए गए थे, वहां जिला मजिस्ट्रेट से यह उम्मीद की जाती थी कि वह NSA के कड़े प्रावधान लागू करने का निर्णय करने से पूर्व रिकॉर्ड की जांच कर लें।
क्यों भड़का हाईकोर्ट?
हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की गिरफ्तारी के संबंध में गंभीर गड़बड़ियां पाईं। आकृति को इस मामले में 11 अप्रैल को शाम साढ़े पांच बजे नोएडा में बॉटिनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से ही गिरफ्तार किया गया था। हालांकि राज्य सरकार ने कहा कि उसे 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि चौधरी और उसके साथियों ने हिंसा भड़काने का षड्यंत्र रचा। अदालत ने बार-बार सरकार से उन सामग्री को पेश करने को कहा जिनसे प्रदर्शित होता हो कि चौधरी ने लोगों को हिंसा के लिए भड़काया। हालांकि राज्य सरकार ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकी।


