काकोली घोष की चिट्ठी पर नहीं हुआ अब तक ऐक्शन; हाउस कमेटी के पास जाने के आसार, बढ़ा इंतजार
काकोली घोष दस्तीदार की यह शिकायत विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद TMC में बढ़ती तनातनी के बीच आई है, जहां असंतोष और आंतरिक टकराव खुलकर सामने आने लगा है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने गुरुवार (28 मई) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी ही पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी पर संसद के भीतर अपशब्द कहने और महिला सांसदों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया था लेकिन उनकी चिट्ठी पर अभी तक लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय की तरफ से कोई ऐक्शन नहीं लिया जा सका है। सूत्रों ने बताया कि दास्तीदार की चिट्ठी अभी लोकसभा के महासचिव के टेबल पर ही पड़ी हुई है और संभावना है कि इस पर सोमवार (01 जून) को कार्रवाई हो और उसे हाउस पैनल के पास भेजा जाए।
काकोली घोष दस्तीदार की यह शिकायत विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद TMC में बढ़ती तनातनी के बीच आई है, जहां असंतोष और आंतरिक टकराव खुलकर सामने आने लगा है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में काकोली ने औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति मांगी और कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पश्चिम बंगाल के बारासात से सांसद काकोली ने पत्र में लिखा, ''मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि मुझे तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति दी जाए, जिन्होंने लोकसभा के भीतर बार-बार मुझे अपशब्द कहे। यह महिला विरोधी व्यवहार कई महिला सदस्यों के साथ हुआ है और ऐसे में दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है।''
TMC की कोई प्रतिक्रिया नहीं
ममता बनर्जी और तृणमूल नेतृत्व की ओर से इस शिकायत पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह घटनाक्रम इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे महज एक दिन पहले चार बार की सांसद काकोली ने तृणमूल के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी नेतृत्व के एक वर्ग के खिलाफ तीखा हमला बोला था। हालांकि, वह अब भी बारासात की सांसद हैं जहां से उन्होंने तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीता था।
TMC के अंदर जबरदस्त खींचतान
तृणमूल के भीतर अंदरूनी खींचतान उस समय खुलकर सामने आ गई, जब काकोली घोष दस्तीदार ने कथित भ्रष्टाचार, आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले और पार्टी के कामकाज में राजनीतिक सलाहकार संस्था 'आई-पैक' के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया। उन्होंने पार्टी के बहिष्कार निर्देश की अनदेखी करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कल्याणी में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था। इसके एक दिन बाद उन्होंने पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
श्रीरामपुर से चार बार सांसद रहे कल्याण बनर्जी अपने बयानों और राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ पार्टी सहयोगियों से टकराव को लेकर कई बार विवादों में घिर चुके हैं। इस ताजा घटनाक्रम से पहले तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी के बीच सार्वजनिक मतभेद देखने को मिले थे। इससे विधानसभा चुनाव की हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती दरारें उजागर हुई हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने सार्वजनिक तौर पर यही कहा है कि पार्टी एकजुट है।
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


