कटमनी लौटाने को लेकर भड़की जनता, बेड के नीचे जा छिपे TMC नेता; बीजेपी ने कस दिया तंज
कटमनी को लेकर भड़की जनता से बचने के लिए एक टीएमसी नेता बेड के नीचे छिप गए। पुलिस पहुंची और उन्हें बाहर निकाला। अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये लोग आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए 20 हजार तक वसूली करते थे।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के दौरान सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर जनता से कटमनी वसूलने वालों की शामत आ गई है। सरकार और जनता के डर से कई जगहों पर वसूली करने वाले लोगों ने जनता के पैसे लौटाए भी हैं। इसी बीच बीजेपी के आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने एक वीडियो शेयर करते हुए टीएमसी पर तंज कसा है। इसमें देखा जा सकता है कि जनता के जनता के डर से एक टीएमसी नेता बेड के नीचे छिप गया।
मालवीय ने बताया कि यह वीडियो कूच बेहार जिले के माथाभंगा का है। यहां के एक स्थानीय नेता शाहिदुल मिया को लोगों ने घेर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक शाहिदुल पर सरकारी आवास की योजना का लाभ दिलाने के लिए 5000 से 20 हजार रुपये की कटमनी लेने का आरोप है। अमित मालवीय ने कहा, गरीबों से वसूली करने वालों को अब बेड के नीचे भी छिपने की जगह नहीं मिल रही है।
मालवीय ने कहा, पश्चिम बंगाल में कटमनी की वजह से इस तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं। राजनेताओं को छिपने की भी जगह नहीं मिल रही है। गुस्साई जनता से बचने के लिए टीएमसी नेता बेड के नीचे छिप गए। पुलिस ने उन्हें वहां से किसी तरह निकाला। पिछले सप्ताह कूच बेहार से ही वीडियो सामने आया था कि कटमनी वसूलने वाले लोग लाइन लगाकार लोगों को पैसे वापस कर रहे हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी ने कहा है कि इस तरह की अवैध वसूली से उसका कोई लेना देना नहीं है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही कूच बिहार के घुघुमारी इलाके में रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर घोषणा की गई थी कि आवास योजना के लिए लिया गया अवैध पैसा ग्रामीणों को वापस किया जाएगा। इसके बाद कई जगहों पर लोगों को पैसा वापस भी किया गया। बीजेपी का कहना है कि ममता सरकार में जो घूस नहीं देता था उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाता है।
रंगदारी के आरोप में गिरफ्तार पूर्व मंत्री के भाई
बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास के भाई 'फेडरेशन ऑफ सिने टेक्नीशियंस एंड वर्कर्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया' के पूर्व अध्यक्ष एवं स्वरूप बिस्वास को गुरुवार शाम रंगदारी मांगने और आपराधिक धमकी देने के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह कार्रवाई एक महिला की शिकायत के परिप्रेक्ष्य में की। महिला ने आरोप लगाया था कि उसे लगभग दो साल से काम नहीं दिया जा रहा था और जब वह काम के मौकों के लिए बिस्वास के पास गई, तो उससे पैसे मांगे गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे धमकी दी गई थी।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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