
फिर सवालों के घेरे में आया चुनाव आयोग, ममता बनर्जी की TMC ने लगाए गंभीर आरोप
टीएमसी ने चुनाव आयोग पर बूथ एजेंटों की नियुक्ति के नियमों में चुपचाप संशोधन करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस नियम को बदलने के पीछे भाजपा का हाथ है।
पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। TMC ने आयोग पर बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) की नियुक्ति के नियमों में "चुपचाप" बदलाव करने का आरोप लगाया है।

ममता बनर्जी की पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "चुपचाप और चालाकी से चुनाव आयोग ने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) की नियुक्ति से संबंधित नियमों में संशोधन कर दिया है।" TMC ने कहा है कि चुनाव आयोग के 2023 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, बीएलए को उस मतदाता सूची के संबंधित इलाके में पंजीकृत मतदाता होना चाहिए जिसके लिए उसे नियुक्त किया गया है।
हालांकि अब इस नियम को बदल दिया गया है। TMC ने कहा, "लेकिन नए, संशोधित निर्देश में कहा गया है कि मतदाता सूची के उसी भाग से बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) उपलब्ध ना होने की स्थिति में, उसी विधानसभा क्षेत्र के किसी भी पंजीकृत मतदाता से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त किया जा सकता है।' टीएमसी ने कहा कि इससे गंभीर सवाल उठते हैं। पार्टी ने कहा, “मौजूदा मानदंडों के मुताबिक, बीएलओ उसी बूथ या कम से कम उसी मतदान केंद्र से संबंधित होने चाहिए। फिर बीएलए के लिए ही अपवाद क्यों बनाया गया?”
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि भाजपा स्थानीय बूथों के भीतर से एजेंट नहीं ढूंढ पा रही है और प्रक्रिया में धांधली करने के लिए बाहरी लोगों को लाना चाहती है। टीएमसी ने चुनाव आयोग पर सत्तारूढ़ भाजपा का चापलूस होने का आरोप लगाया। सीईसी ज्ञानेश कुमार की ओर इशारा करते हुए पार्टी ने कहा, "कोई आश्चर्य नहीं कि अमित शाह के सहकारिता मंत्रालय के सचिव को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद दिया गया ताकि भाजपा की राजनीतिक सुविधा के लिए नियमों को फिर से लिखा जा सके।"



