कूटनीति का समय गया, सर्जरी से ही इलाज होगा; असम सीएम की बांग्लादेश को चेतावनी
असम सीएम ने बांग्लादेश में जारी अशांति के बीच गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कूटनीति का समय समाप्त हो गया है, और संकट का समाधान 'सर्जरी' से ही संभव है। यह स्थिति असम के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

बांग्लादेश में जारी अशांति और इसके भारत की सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कूटनीति का समय अब समाप्त होने की कगार पर है और पड़ोसी देश में संकट का स्थायी समाधान केवल 'सर्जरी' से ही संभव है। सीएम ने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से असम के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
'चिकन नेक' भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता
न्यूज18 के 'राइजिंग असम कॉन्क्लेव' में बोलते हुए सीएम शर्मा ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर को भारत की सबसे बड़ी सामरिक चिंता बताया। इसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है। यह संकीर्ण गलियारा पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और इसके दोनों तरफ बांग्लादेश स्थित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को एक दिन इस क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए 20-22 किलोमीटर जमीन लेनी पड़ सकती है- चाहे कूटनीति से हो या बलपूर्वक। उन्होंने चिकित्सकीय उदाहरण देते हुए कहा कि जब दवा काम नहीं करती, तो सर्जरी जरूरी हो जाती है। शर्मा ने 'चिकन नेक' को एक 'अधूरा एजेंडा' करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका समय और तरीका केंद्र सरकार तय करेगी और धैर्य रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम अधीर नहीं होने चाहिए। इतिहास का अपना क्षण होता है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर निशाना साधते हुए असम सीएम ने कहा कि मोहम्मद यूनुस की सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी। वर्तमान शासन ने भारत, खासकर सीमावर्ती राज्यों के लिए चिंताजनक स्थितियां पैदा की हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से स्थिति सुधर सकती है, लेकिन मौजूदा चुनौती पहले से कहीं अधिक गंभीर है।
इंदिरा गांधी की 'ऐतिहासिक गलती'?
1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए शर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसलों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय भारत 'चिकन नेक' की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए जमीन मांग सकता था। ऐसा न होने के कारण आज भी इस गलियारे से जुड़े खतरे बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने विभाजन के समय कांग्रेस की नीतियों को मौजूदा समस्याओं का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि जनमत संग्रह होता, तो बांग्लादेश के हिंदू भारत चुनते। गलत फैसलों के कारण कई लोग अनिच्छा से पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में रह गए, जिससे दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय और सुरक्षा चुनौतियां पैदा हुईं।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार
शर्मा ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर गहरी चिंता जताई। एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास हत्या का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर क्रूरता अस्वीकार्य है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। लेकिन जब किसी को केवल हिंदू होने के कारण निशाना बनाकर मारा जाता है, तो गुस्सा दोगुना हो जाता है।
असम की जनसंख्या में बदलाव: '40% बांग्लादेशी मूल के'
शर्मा ने असम की जनसंख्या में बदलाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता के समय जहां 10-15 प्रतिशत आबादी बांग्लादेशी मूल की थी, वहीं अब यह करीब 40 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने स्थिति को 'बारूद के ढेर पर बैठने' जैसा बताया। आगे की भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना तक असम में हिंदू और मुस्लिम आबादी बराबर हो सकती है। इन जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण राज्य का शासन जटिल होता जा रहा है।
शर्मा ने कहा कि शेख हसीना के बाद का बांग्लादेश तेजी से उग्रवाद की ओर बढ़ रहा है। ऐसे देशों के साथ भारत एक पेज पर नहीं रह सकता, इसलिए मतभेद अपरिहार्य हैं। इंटरव्यू के अंत में शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते असम बेहद संवेदनशील है। बाहरी खतरों और आंतरिक बदलावों ने राज्य को ऐसे मोड़ पर ला दिया है जहां कठोर फैसले टाले नहीं जा सकते। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में ताजा अशांति के कारण असम को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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