यह आपकी असेंबली नहीं, चीफ जस्टिस का कोर्ट है; UGC केस में किस वकील पर भड़क गए CJI
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद पी. विल्सन पेश हुए, जबकि केंद्र और UGC का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे थे। मूल याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने किया।

तमिलनाडु सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के बीच चल रही कानूनी जंग ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में हलचल बढ़ी दी। सुनवाई के दौरान दलीलों का स्तर ऐसा हो गया कि देश के मुख्य न्यायाधीश को हस्तक्षेप कर मर्यादा की याद दिलानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ मद्रास उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद पी. विल्सन पेश हुए, जबकि केंद्र और UGC का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे थे। मूल याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने किया।
‘यह असेंबली नहीं, सुप्रीम कोर्ट है’
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जब पी. विल्सन ने UGC की भूमिका और उच्च न्यायालय के फैसले पर बेहद आक्रामक और तीखी दलीलें पेश करना शुरू किया तो बहस काफी व्यक्तिगत और शोर-शराबे वाली हो गई। बहस के बढ़ते स्तर को देखते हुए CJI सूर्यकांत ने टोकते हुए कहा, "कृपया स्वयं को याद दिलाएं कि यह असेंबली नहीं है। यह कोर्ट नंबर 1 है। भारत का उच्चतम न्यायालय।"
आपको बता दें कि एक अन्य केस में तमिलनाडु में कुलपतियों की नियुक्ति के अधिकार को लेकर चल रही कानूनी जंग में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा इन कानूनों पर लगाए गए अंतरिम स्टे को रद्द कर दिया, लेकिन साथ ही एक शर्त भी रखी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के मई 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने राज्य सरकार के नए कानूनों पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने राज्य सरकार को जवाब देने का पर्याप्त मौका दिए बिना जल्दबाजी में कानून पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट से कहा कि वह इस संवेदनशील मामले पर 6 सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला सुनाए। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और पी. विल्सन ने अदालत को आश्वासन दिया कि जब तक हाई कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक राज्य सरकार कोई नई नियुक्ति नहीं करेगी।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
और पढ़ें


