
ये लोग अपने नाम के आगे नहीं लगा सकते डॉ, हाई कोर्ट ने दिया आदेश
कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता वाले फिजियोथेरेपिस्ट और व्यावसायिक चिकित्सक एक्सटेंशन पी1 और पी1(ए) में उल्लिखित 'डॉ' का इस्तेमाल नहीं करें।
केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक आदेश पारित किया है, जिसमें उसने बताया कि कौन-कौन अपने नाम के आगे डॉ. (डॉक्टर) नहीं लगा सकता है। कोर्ट ने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, जिनकेपास मान्यता प्राप्त मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है, उनके द्वारा अपने नाम के आगे डॉ. नहीं लगाने का आदेश दिया। जस्टिस वीजी अरुण को बताया गया कि भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 (प्रदर्श पी1) के प्रावधानों और फिजियोथेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम (प्रदर्श पी1(ए)) के प्रावधानों के बीच विरोधाभास है।

'लाइव लॉ' के अनुसार, कोर्ट ने यह भी बताया किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा फिजियोथेरेपी के लिए योग्यता आधारित पाठ्यक्रम - अनुमोदित पाठ्यक्रम, 2025 में फिजियोथेरेपिस्ट के लिए 'डॉ.' के इस्तेमाल को हटाने के संबंध में एक निर्देश था, क्योंकि किसी भी फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता के बिना 'डॉक्टर' शीर्षक का इस्तेमाल करना भारतीय चिकित्सा डिग्री अधिनियम का उल्लंघन होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'सक्षम अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता वाले फिजियोथेरेपिस्ट और व्यावसायिक चिकित्सक एक्सटेंशन पी1 और पी1(ए) में उल्लिखित 'डॉ' का इस्तेमाल नहीं करें।' अब इस मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी।

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
और पढ़ें



