
NIA दिल्ली तो PMLA नोएडा में... बीच सुनवाई NCR शहरों के बीच बंटवारा क्यों करने लगे CJI सूर्यकांत?
CJI ने कहा कि ये शातिर अपराधी दिल्ली में अपराध करते हैं, फिर गुड़गांव चले जाते हैं, गाजियाबाद में अपराध करते हैं और फिर दिल्ली वापस आ जाते हैं। MCOCA की तरह क्षेत्राधिकार संबंधी पहलुओं को संभालने वाला कोई कानून क्यों नहीं हो सकता?
CJI Suryakant: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ आज (मंगलवार, 16 दिसंबर को) दिल्ली में गैंगस्टरों से जुड़े मुकदमों की बढ़ती पेंडेंसी पर स्वत: सुनवाई कर रही थी। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि अपराधी अलग-अलग क्षेत्राधिकार का फायदा उठाकर सीमा पार कर बच रहे हैं। पीठ ने पाया कि संगठित अपराधी केंद्रीय दंड कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में अक्सर क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलताओं का अनुचित लाभ उठाते हैं। इसी बात को रेखांकित करते हुए CJI ने कुछ ऐसे स्पेशल कोर्ट की जरूरत पर बल दिया जो किसी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड जैसे हों।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “मान लीजिए UAPA और NIA का मामला है, तो एक विशेष अदालत हो सकती है। ये अदालतें अस्पताल के आपातकालीन वार्ड की तरह होनी चाहिए। मान लीजिए NIA का मुकदमा चल रहा है, तो केवल वही मामला चलेगा। जब NIA या UAPA का मामला नहीं होगा, तो वहां सामान्य दीवानी और आपराधिक मामले चल सकेंगे।”
एक राज्य में अपराध शुरू हो दूसरे राज्य में फैल जाता है
CJI ने कहा कि अक्सर अपराध एक राज्य में शुरू होते हैं और दूसरे राज्य में जारी रहते हैं या फैल जाते हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस न्यायालय या जांच एजेंसी को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “केंद्रीय दंड संहिता के तहत गंभीर अपराधों के मामलों में, जहां संगठित अपराधी शामिल होते हैं, वे एनसीआर में क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दों का अनुचित लाभ उठाते हैं। कभी-कभी अपराध एक राज्य में शुरू होता है और अपराधी दूसरे राज्य में चला जाता है। त्वरित जांच के लिए किस न्यायालय या एजेंसी को संज्ञान लेना चाहिए या किस न्यायालय के पास सक्षम क्षेत्राधिकार है, यह स्वयं आपराधिक मुकदमे में एक मुद्दा बन जाता है।”
दिल्ली में अपराध करते हैं, फिर गुड़गांव चले जाते हैं
उन्होंने कहा, "ये शातिर अपराधी दिल्ली में अपराध करते हैं, फिर गुड़गांव चले जाते हैं, फिर गाजियाबाद में अपराध करते हैं और फिर दिल्ली वापस आ जाते हैं... MCOCA की तरह क्षेत्राधिकार संबंधी पहलुओं को संभालने वाला कोई कानून क्यों नहीं हो सकता?" इस पर वहां मौजूद एक वकील ने कहा कि लेकिन MCOCA तो दिल्ली पर लागू होता है। तभी उस वकील की बात काटते हुए CJI ने कहा, "लेकिन NCR को कवर करने वाला कानून क्यों नहीं हो सकता? मान लीजिए अपराध दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास हुआ है... तो कानून यह क्यों नहीं कह सकता कि दिल्ली में चल रहे मुकदमे का क्षेत्राधिकार उस पर होगा?"
NIA अदालत दिल्ली में, PMLA अदालत नोएडा में
इसी बीच जस्टिस बागची ने कहा, "यह एक विधायी प्रक्रिया है।" इस पर सीजेआई ने कहा, "NIA अदालत दिल्ली में, PMLA अदालत नोएडा में और अन्य अदालतें गुड़गांव में हो सकती हैं.. ताकि काम का उचित बंटवारा हो सके... शातिर अपराधियों को क्षेत्राधिकार आदि का लाभ क्यों मिलना चाहिए?" इसी दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि हमारी स्टेटस रिपोर्ट में गृह सचिव द्वारा अनुमोदित बैठक का विवरण शामिल है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, गृह सचिव द्वारा राज्यों को उच्च न्यायालयों में मामला उठाने के लिए कहना हमें पसंद नहीं आया। हालांकि, ASG ने फिर कहा कि हमने उन राज्यों की पहचान की है जहां 10 एनआईए मुकदमे चल रहे हैं। केरल में कई पीएफआई मुकदमे हैं। बिहार में भी। हमारे पत्र और मसौदा नियम भी संलग्न हैं। हम कार्रवाई रिपोर्ट भी दाखिल कर सकते हैं।
इसी बीच, जस्टिस बागची ने CJI की बात से सहमति जताते हुए कहा, एनआईए की धारा 5 और 6 यहां उपयोगी हो सकती हैं। वे ऐसे सभी मामलों को अपने हाथ में ले सकते हैं और दिल्ली में मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगले कुछ महीनों में दिल्ली में 16 अदालतों की स्थापना होने की संभावना है।





