
सहमति से सेक्स और रेप में होता है फर्क, ब्रेकअप का नाम लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
साल 2024 में छत्रपति संभाजीनगर में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता एक शादीशुदा महिला थीं, जो पति से अलग रह रही थीं। उनकी मुलाकात वकील से 2022 में हुई। एक केस में सहयोग के दौरान दोनों की करीबी बढ़ी और शारीरिक संबंध भी बने।
बलात्कार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अदालत ने कहा कि अगर सहमति से बने संबंधों में ब्रेक अप हो जाता है, तो इसके चलते पुरुष के खिलाफ रेप केस नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ दर्ज केस खारिज कर दिया। याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि शादी का झूठा वादा कर रेप करने के मामले में आरोपों से जुड़े स्पष्ट सबूत होने चाहिए।

बेंच ने कहा कि एक रिश्ते को रेप सिर्फ इसलिए नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसका अंत निराशा या असहमति के चलते हुआ है। बेंच ने कहा, 'सहमति से संबंध में रह रहे कपल के बीच अगर ब्रेक अप हो जाता है, तो सिर्फ इसके चलते आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती...। शुरुआत में जो संबंध सहमति से बना था, अगर वह शादी में तब्दील नहीं हो सके तो उसे अपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।'
कोर्ट ने कहा कि रेप केस के लिए यह भी दिखाना जरूरी है कि शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया गया था। साथ ही यह भी दिखाया जाना जरूरी है कि महिला ने उस वादे के कारण सहमति दी थी। बेंच ने कहा, 'रेप और सहमति से सेक्स में फर्क है। कोर्ट को ध्यान से यह जांच करनी चाहिए कि क्या आरोपी वाकई पीड़िता से शादी करना चाहता था या सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए झूठा वादा कर रहा था।'
हाईकोर्ट का फैसला खारिज
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने औरंगाबाद के वकील के खिलाफ दर्ज रेप केस को खारिज करने से इनकार कर दिया था। साल 2024 में छत्रपति संभाजीनगर में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता एक शादीशुदा महिला थीं, जो पति से अलग रह रही थीं। उनकी मुलाकात वकील से 2022 में हुई। एक केस में सहयोग के दौरान दोनों की करीबी बढ़ी और शारीरिक संबंध भी बने।
महिला ने शिकायत की थी कि वकील ने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में मुकर गया। महिला के आरोप थे कि इस दौरान वह कई बार गर्भवती हुई, लेकिन उसकी सहमति से इन्हें खत्म किया गया। जब वकील ने शादी से इनकार कर दिया और धमकी दी, तब उन्होंने शादी के झूठे वादे के आरोप लगाकर FIR दर्ज कराई।
वकील के आरोप
आरोपी वकील ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि शिकायत बदले की भावना से की गई थी। साथ ही आरोप थे कि जब उन्होंने महिला को डेढ़ लाख रुपये देने से इनकार कर दिया, तब ये शिकायत की गई है। आरोपी ने कहा कि तीन साल के रिलेशन के दौरान महिला ने कभी भी यौन हिंसा की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
कोर्ट ने पाया कि शिकायतों से पता चला है कि रिश्ते में कई बार मुलाकात हुआ और जबरदस्ती या धोखे से नहीं, बल्कि सहमति से संबंध बने। बेंच ने कहा कि आपसी लगाव के चलते हुए यौन संबंधों को अपराध सिर्फ इसलिए नहीं माना जा सकता, क्योंकि शादी का वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'मौजूदा केस में यह कहीं नहीं है कि अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को सिर्फ शारीरिक सुख के लिए फुसलाया था और गायब हो गया था। रिश्ता तीन सालों तक चला, जो काफी लंबा समय है।'
कोर्ट ने चेताया
जज ने असफल रिश्तों के मामलों में बलात्कार के प्रावधानों के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है। बेंच ने पाया कि महिला शिक्षित है। साथ ही कहा कि महिला की खुद शादी में रहने के बावजूद सहमति से रिश्ता जारी रखा। कोर्ट ने कहा कि किसी भी घटना से जबरदस्ती या शारीरिक धमकी का पता नहीं चलता है।





