
विवादों में फिल्म ‘द ताज स्टोरी’, वकील ने परेश रावल को भेजा नोटिस- मेरी किताब से कॉपी किया
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया गया, तो वे कॉपीराइट उल्लंघन के तहत अदालत में मामला दायर करेंगे और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के वकील आशीर्वाद कुमार यादव ने ‘द ताज स्टोरी’ फिल्म के अभिनेता परेश रावल, निर्देशक तुषार अमरीश गोयल और निर्माता सी.ए. सुरेश झा को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह की ओर से जारी किया गया है, जिन्होंने फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पर अपने मौलिक साहित्यिक और शोध कार्य के अनधिकृत उपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।

4 नवंबर को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ ने रुद्र विक्रम सिंह की 2023 में प्रकाशित पुस्तक ‘22 रूम्स ऑफ ताजमहल’ से बिना अनुमति कई हिस्सों को अपनाया है। यह फिल्म स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनी है।
कई सालों के शोध का दावा
नोटिस के अनुसार, रुद्र विक्रम सिंह की पुस्तक फरवरी 2023 में प्रकाशित हुई थी और यह ताजमहल के 22 बंद कमरों से जुड़ी ऐतिहासिक और वास्तुशिल्पीय रहस्यों पर आधारित गहन शोध का परिणाम है। रुद्र विक्रम सिंह का कहना है कि यह पुस्तक वर्षों की स्वतंत्र रिसर्च पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का विश्लेषण और व्याख्या अपने दृष्टिकोण से की है।
सिंह ने 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी, जिसमें ताजमहल के 22 बंद कमरों को सार्वजनिक रूप से खोले जाने की मांग की गई थी। उस याचिका के बाद यह विषय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गया था।
फिल्म में ‘सीधी समानता’ का आरोप
नोटिस में कहा गया है कि फिल्म ‘The Taj Story’ की कहानी और संवादों में रुद्र विक्रम सिंह की पुस्तक से मिलते-जुलते ऐतिहासिक संदर्भ, व्याख्याएं और शोध-आधारित दावे शामिल हैं। बावजूद इसके, फिल्म के किसी भी आधिकारिक पोस्टर, ट्रेलर या प्रचार सामग्री में लेखक का नाम या श्रेय नहीं दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि दोनों कृतियों में समानता इतनी स्पष्ट है कि यह मेरे मुवक्किल के नैतिक अधिकारों का उल्लंघन है, जो कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 57 के तहत संरक्षित हैं। साथ ही यह धारा 14 और 51 के अंतर्गत अनधिकृत रूपांतरण और पुनरुत्पादन की श्रेणी में आता है।”
‘रचनात्मक अभिव्यक्ति’ पर अधिकार का दावा
सिंह की ओर से भेजे गए नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि ऐतिहासिक तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आते हैं, परंतु उन तथ्यों के चयन, क्रम और व्याख्या का तरीका किसी व्यक्ति की मौलिक रचनात्मक अभिव्यक्ति होती है- जिसे बिना अनुमति उपयोग नहीं किया जा सकता। नोटिस में फिल्म निर्माताओं पर अनुचित लाभ उठाने और लेखक के नैतिक एवं आर्थिक अधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
श्रेय देने और सार्वजनिक माफी की मांग
रुद्र विक्रम सिंह ने मांग की है कि फिल्म के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें, फिल्म के क्रेडिट्स और सभी प्रमोशनल सामग्री में उनका नाम शामिल करें, और आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक सार्वजनिक बयान जारी करें। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया गया, तो वे कॉपीराइट उल्लंघन के तहत अदालत में मामला दायर करेंगे और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
फिल्म निर्माताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस विवाद पर अब तक फिल्म के निर्माता या निर्देशक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नोटिस में उल्लिखित समानताएं प्रमाणित होती हैं, तो मामला कॉपीराइट और नैतिक अधिकारों के उल्लंघन के गंभीर दायरे में आ सकता है।
फिलहाल, फिल्म ‘The Taj Story’ को लेकर बढ़ते विवाद ने इसके रिलीज़ से पहले ही इसे सुर्खियों में ला दिया है।





