
जनगणना की तैयारी का पहला चरण शुरू, इन जिलों में हो रहा ट्रायल; सॉफ्टवेयर की परीक्षा
संक्षेप: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस 20-दिवसीय परीक्षण के दौरान एकत्र किया गया डेटा केवल प्रणाली मूल्यांकन के लिए होगा और इसे आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा।
देश में 14 साल बाद होने वाली जनगणना की तैयारी का पहला चरण सोमवार से शुरू हो गया है। यह चरण एक पूर्व-परीक्षण के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आगामी जनगणना के लिए विकसित डिजिटल सिस्टम की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन करना है। इस दौरान यह परखा जाएगा कि जनगणना के लिए तैयार किया गया सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है और खामियां क्या हैं। यह परीक्षण 30 नवंबर तक चलेगा।

भारत में पिछली जनगणना 2011 में की गई थी। वर्ष 2021 में निर्धारित अगली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। अब जनगणना 2027 की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (RG&CCI) ने 16 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर इस पूर्व-परीक्षण की घोषणा की थी।
चुने गए जिले
पूर्व-परीक्षण के लिए कर्नाटक राज्य के तीन जिलों को चुना गया है-
- बेंगलुरु शहरी (JP पार्क वार्ड)
- उत्तर कन्नड़ (सुपा तालुक के 46 गांव)
- चामराजनगर (गुंडलुपेट तालुक के 27 गांव)
इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है ताकि डिजिटल जनगणना एप्लिकेशन को विविध परिस्थितियों- जैसे शहरी क्षेत्रों और सीमित मोबाइल नेटवर्क वाले ग्रामीण इलाकों में परखा जा सके।
डिजिटल जनगणना की दिशा में कदम
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। पारंपरिक कागजी फॉर्म की जगह अब एक मोबाइल एप्लिकेशन आधारित प्रणाली से आंकड़े जुटाए जाएंगे। जनगणना अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रायल भारत की जनगणना प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
क्या पूछा जाएगा परिवारों से
पूर्व-परीक्षण के दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी एकत्र करेंगे। लगभग 30 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें घर का पता, मकान का नंबर, मकान की मंजिल, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या, पेयजल का मुख्य स्रोत, लाइट का साधन, शौचालय की सुविधा, खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला ईंधन और खानपान की आदतें जैसी जानकारियाँ शामिल होंगी।
आधिकारिक जनगणना दो चरणों में होगी-
1. हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) और
2. जनसंख्या गणना
इन दोनों चरणों का आयोजन 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच किया जाएगा। वर्तमान पूर्व-परीक्षण इसी प्रक्रिया की दक्षता और व्यवहार्यता की जांच के लिए किया जा रहा है।
डिजिटल भागीदारी को प्रोत्साहन
पूर्व-परीक्षण के दौरान 1 नवंबर से 7 नवम्बर तक स्वयं गणना की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। चयनित क्षेत्रों के निवासी इस अवधि में जनगणना पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी भर सकते थे।
प्रशिक्षण और व्यवस्था
मैदानी अधिकारियों और गणनाकर्मियों के लिए 4 से 6 नवंबर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सभी क्षेत्रीय टीमें एक समान मानक के अनुसार काम करें और डिजिटल प्रणाली का सही उपयोग कर सकें।
केवल सिस्टम जांच के लिए डेटा
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस 20-दिवसीय परीक्षण के दौरान एकत्र किया गया डेटा केवल प्रणाली मूल्यांकन के लिए होगा और इसे आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। यह पूर्व-परीक्षण न केवल डिजिटल प्रणाली की सटीकता और उपयोगिता की परीक्षा है, बल्कि भारत की जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।





