जहर इतना कि काटने से मर जाए हाथी, लेकिन ममता से भरी; मादा किंग कोबरा की अनूठी कहानी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

सांपों की एक ऐसी प्रजाति, जिसे सबसे जहरीला माना जाता है। कहते हैं कि किंग कोबरा का कांटा पानी भी नहीं मांगता। लेकिन उसी किंग कोबरा की मादा प्रजाति अपने बच्चों के लिए ऐसा त्याग करती है, जिसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है।

King Cobara News

सांपों की एक ऐसी प्रजाति, जिसे सबसे जहरीला माना जाता है। कहते हैं कि किंग कोबरा का कांटा पानी भी नहीं मांगता। लेकिन उसी किंग कोबरा की मादा प्रजाति अपने बच्चों के लिए ऐसा त्याग करती है, जिसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है। अंडे देने से लेकर, उनके बाहर आने तक मैनेजमेंट, देखभाल और ममता का अनोखा संसार। फिर जब बच्चे अपने अंडे से बाहर आने वाले होते हैं तो वहीं किंग कोबरा मां, उन्हें छोड़कर इस तरह गायब हो जाती है, जैसे उसे अपने बच्चों से कोई मोह ही नहीं हो। लेकिन इसके पीछे भी बहुत बड़ा तथ्य है। तो आइए आपको लेकर चलते किंग कोबरा की अनोखी दुनिया में और सुनाते हैं, मादा किंग कोबरा के ममत्व और त्याग की अनोखी दास्तान...

मदर किंग कोबरा की कहानी
हर कहानी को सुनाने का एक बहाना होता है। किंग कोबरा की इस कहानी को सुनाने का बहाना बनी है, उत्तराखंड में फिल्माई गई एक डॉक्यूमेंट्री। इस डॉक्यूमेंट्री का नाम है, ‘द डिवाइन मदर’। यह डॉक्यूमेंट्री किंग कोबरा सांप पर पूरी तरह से आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि मादा किंग कोबरा, किस तरह से अपने अंडों की सुरक्षा करती है। यह सांपों में सबसे अनोखी बात है। इस डॉक्यूमेंट्री को वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और पद्मश्री से सम्मानित अनूप शाह ने प्रोड्यूस किया है। उनका साथ दिया है कर्न्जवेशनिस्ट पार्थ शर्मा ने। निर्देशन फिल्ममेकर अजय सूरी ने किया है। इसको बनाने में करीब 18 महीने का समय लगा है। अब 9 से 13 सितंबर के बीच इस डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन ग्रीन स्क्रीन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में होने वाला है। इसको लेकर उत्तराखंड के वन और पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने खुशी जताई है। आइए जानते हैं कि फीमेल किंग कोबरा कैसे अंडे देती है, फिर उनकी कैसे रक्षा करती है और यह बच्चे दुनिया में कैसे आते हैं।

सांपों में सबसे अलग
मादा किंग कोबरा की नेस्टिंग सांपों की दुनिया की सबसे अनोखी और ड्रामाटिक कहानी है। आमतौर पर ऐसा पक्षियों में या फिर मगरमच्छों में देखा जाता है कि वह अपने अंडे के लिए घोसला तैयार करती हैं। लेकिन फीमेल किंग कोबरा भी ऐसा करती है, जबकि दूसरे सांप ऐसा नहीं करते। बरसों के शोध और तमाम प्रयासों के बावजूद यह अनोखी कहानी हमारी सामने आई है। लंबे समय तक माना जाता रहा कि सांपों में कोई भावना नहीं होती। लेकिन द डिवाइन मदर ऐसे ही बहुत से मिथ्स से पर्दा उठाती है।

मेहनत और भूख
मादा किंग कोबरा, अपने अंडों को सुरक्षित रखने के लिए बांस की झुरमुट या किसी बड़े पेड़ के तने को चुनती है। वह बड़ी मेहनत से सूखी पत्तियां जुटाती है। इसके बाद वह अपने अंडों को शरीर के सहारे उनके ऊपर चढ़ाती है। गौर करने वाली बात है कि इस सबमें उसे अच्छी-खासी मेहनत करनी पड़ती है। फिर भी वह पीछे नहीं हटती और करीब 15 से 50 अंडों को बेहर सुरक्षित ढंग से एक चेंबरनुमा जगह बनाकर रख देती है। अब अगले 75 से 100 दिन तक मादा किंग कोबरा पूरी तरह से भूखी रहती है। वह दिन-रात बस अपने अंडों को सुरक्षित रखने में लगी रहती है। धूप-बारिश, जंगली जानवरों से उनकी हिफाजत करती रहती है।

फिर आता है त्याग का समय
अब आती है परीक्षा की असली घड़ी। तीन महीने तक भूखे रहकर अंडों की हिफाजत करने में जुटी मां किंग कोबरा, ठीक उस वक्त वहां से निकल लेती जब उसके बच्चे दुनिया में आने वाले होते हैं। ऐसा नहीं है कि उसे अपने बच्चों का मोह नहीं होता। बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही ठोस वजह है। असल में किंग कोबरा दूसरे सांपों को खा जाते हैं। ऐसे में मां किंग कोबरा की अंतरात्मा कहती है कि कहीं सांप के रूप में अपने बच्चों को अंडे से बाहर आता देख उसकी भूख न भड़क उठे। इसलिए वह जल्द से जल्द उन्हें छोड़कर चली जाती है।

कैसे सामने आई यह कहानी
इस कहानी को सामने लाने के पीछे, तमाम रिसर्च हैं। इनमें से ही एक रिसर्च, स्नेक मैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले अमेरिकी मूल के रोमुलुस व्हिटाकर की है। उन्होंने दशकों तक किंग कोबरा की नेस्टिंग पर काम किया है। इसके लिए वह वेस्टर्न घाट सरीखी तमाम जगहों पर गए। रिसर्च के दौरान पाया गया कि किंग कोबरा कमाल के इंजीनियर होते हैं। यह जो घोसला बनाते हैं, वह सिर्फ कीचड़ का ढेर नहीं होता। बल्कि उसे इस बारीकी से तैयार किया गया होता है कि उसमें कई परते होती हैं। यह वॉटरप्रूफ भी होता है, जिससे बारिश में अंडों की हिफाजत होती है। यही नहीं, भारी मॉनसून के दौरान इन घोसलों में लगी पत्तियां सड़ती हैं, जिनसे गर्मी पैदा होती है और एक प्राकृतिक गर्माहट पैदा होती है।

किंग कोबरा संग मनुष्यों का तालमेल बनाने की कोशिश
किंग कोबरा के साथ मनुष्यों का तालमेल बनाने की पहल शुरू की गई है। असल में कर्नाटक के आगुंबे और उत्तराखंड के कुमाऊं-गढ़वाल के पहाड़ों पर किंग कोबरा इंसानी रिहाइश के पास नेस्टिंग करते हैं। लेकिन चूंकि किंग कोबरा काफी विषैला होता है और कहा जाता है कि नेस्टिंग फीमेल किंग कोबरा अगर डंस ले तो हाथी भी मर जाए। ऐसे में इंसान अपनी रिहाइश के आस-पास अगर इन अंडों को देखते हैं तो उन्हें खत्म कर देते हैं। अब कन्जर्वेशन टीम स्थानीय ग्रामीणों को मनाने में जुटी हैं कि वह ऐसा न करें। इसके चलते गांव के परिवार करीब तीन महीने तक के लिए अपना पूरा रूटीन बदल देते हैं, ताकि अंडों को पाल रही मां किंग कोबरा को कोई परेशानी न हो।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।