मैं माफी क्यों मांगू; ऑपरेशन सिंदूर में भारत हारा कहने वाले कांग्रेस नेता बोले
कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कही गई बात पर माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार संविधान देता है। उन्होंने सेना पर भी सवाल उठाए थे।
कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कही गई बात पर माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार संविधान देता है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चव्हाण ने दावा किया था कि भारत ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन हार गया था। साथ ही उन्होंने सेना में लाखों सैनिकों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि ज्यादा सैनिकों को कुछ और काम पर लगाया जाना चाहिए।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में चव्हाण ने कहा, 'मैं क्यों माफी मांगूंगा? संविधान ने मुझे सवाल पूछने का अधिकार दिया है...।' उन्होंने बताया कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही मीडिया से विस्तार से बात करने वाले हैं। जब सवाल किया गया कि क्या उनकी तरफ से दिया गया बयान गलत था क्या? इसपर उन्होंने कहा, 'बिल्कुल नहीं था।'
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हार का दावा
एएनआई के अनुसार, पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चव्हाण ने कहा, '(ऑपरेशन सिंदूर) के पहले ही दिन पूरी तरह से हार चुके थे। 7 मई को चले आधे घंटे के हवाई संघर्ष में हार गए थे। अब लोग इसे स्वीकार करें या न करें। भारतीय विमान गिरा दिए गए थे। वायुसेना पूरी तरह से जमीन पर थी और एक भी विमान नहीं उड़ा। अगर कोई विमान ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा से उड़ता तो इस बात की काफी संभावनाएं थीं कि उसे पाकिस्तान गिरा देता। इसके चलते वायुसेना पूरी तरह से जमीन पर थी।'
सेना में सैनिकों की संख्या पर सवाल
पीटीआई भाषा के अनुसार, चव्हाण ने कहा, 'सेना की बात करें तो हमारे पास 12 लाख से 15 लाख सैनिक हैं, जबकि पाकिस्तान के पास पांच लाख से छह लाख सैनिक हैं। लेकिन इसका (बड़ी संख्या का) कोई महत्व नहीं है क्योंकि उस तरह का युद्ध (जमीनी स्तर पर) अब नहीं होगा।' यहां पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इतनी बड़ी सेना रखने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'अब यह मायने नहीं रखता कि आपके पास कितनी पैदल सेना है, क्योंकि कोई भी आपको उस तरह का युद्ध नहीं करने देगा। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा है कि सेना एक किलोमीटर भी आगे नहीं बढ़ी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लड़ाई सिर्फ हवाई और मिसाइल हमलों तक सीमित रही और आगे भी युद्ध इसी तरह होंगे।' चव्हाण ने कहा, 'ऐसे में 12 लाख सैनिकों की सेना रखने की क्या जरूरत है? उन्हें किसी और काम में लगाना बेहतर होगा।'

लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
और पढ़ें



