
टेलीग्राम पर आतंकी डॉक्टरों का ग्रुप, 'दोधारी तलवार' को बनाया था अड्डा; डीकोड करने में जुटी एजेंसियां
टेलीग्राम पर 'रेडिकल डॉक्टर ग्रुप' नाम से एक चैनल बनाया गया था। इसमें गिरफ्तार डॉक्टर आदिल अहमद, डॉ मुजम्मिल शकील और संदिग्ध हमलावर उमर मोहम्मद भी शामिल थे। बताया जाता है कि डॉक्टर उमर डॉ आदिल के बेहद करीबी थे।
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के आसपास 10 नवंबर (सोमवार) को हुए कार बम धमाके ने पूरे देश को सन्न कर दिया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं और जांच तेज कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया कि विस्फोट में आत्मघाती हमलावर के रूप में शक के घेरे में आए डॉक्टर उमर मोहम्मद एक कट्टरपंथी डॉक्टरों के गुप्त नेटवर्क का हिस्सा था। वह अपनी गतिविधियों को लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के माध्यम से संचालित करता था। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उमर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ था। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जैश के एक महत्वपूर्ण मॉड्यूल से संबंधित दो अन्य डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद वह व्याकुल हो गया था, और इसी डर से उमर ने लाल किले के पास यह खतरनाक हमला कर दिया।

बताया जा रहा है कि टेलीग्राम पर 'रेडिकल डॉक्टर ग्रुप' नाम से एक चैनल बनाया गया था। इसमें गिरफ्तार डॉक्टर आदिल अहमद, डॉ मुजम्मिल शकील और संदिग्ध हमलावर उमर मोहम्मद भी शामिल थे। बताया जाता है कि डॉक्टर उमर डॉ आदिल के बेहद करीबी थे। सूत्रों के मुताबिक, ये डॉक्टर टेलीग्राम चैनल पर आपस में बातचीत कर रहे थे। टेलीग्राम चैनल पर बातचीत के एन्क्रिप्टेड होने के कारण ही शायद इसका इस्तेमाल किया गया। हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस टेलीग्राम चैनल से कितने लोग जुड़े थे और उनके बीच क्या-क्या चर्चा हो रही थी। अगर सदस्यों की संख्या और बातचीत डीकोड हो गई, तो कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
टेलीग्राम का स्पष्टीकरण
मामला सामने आने के बाद टेलीग्राम ने भी अपना पक्ष रखा है। कंपनी का दावा है कि उसके सेवा नियमों में हिंसा को उकसाने या आतंकवाद का प्रचार करने वाले आह्वानों पर कड़ा प्रतिबंध है, और ऐसी सामग्री का पता चलते ही उसे तुरंत हटाया जाता है। टेलीग्राम अपने मंच के सार्वजनिक भागों पर निरंतर नजर रखता है और उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर रोजाना लाखों नुकसानदेह सामग्रियों को हटाने का कार्य करता है। इस प्रक्रिया को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से, टेलीग्राम ने चरमपंथी विचारधाराओं से लड़ने वाले वैश्विक केंद्र (जीसीसीटीआई) के साथ सहयोग स्थापित किया है। टेलीग्राम भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2021 का पूरी तरह से अनुपालन करता है।
टेलीग्राम: गोपनीयता का दोधारी तलवार
दुनिया भर के असंख्य यूजर्स के लिए टेलीग्राम एक सामान्य सुरक्षित सोशल मीडिया या चैट ऐप जैसा प्रतीत होता है। लेकिन यह एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, जो खुद को गोपनीयता-केंद्रित और मजबूत मैसेजिंग सेवा के रूप में पेश करता है, धीरे-धीरे आतंकवाद, आपराधिक योजनाओं और अफवाहों का केंद्र बनता जा रहा है।
यह ऐप 2013 में रूसी अरबपति पावेल डुरोव और उनके भाई निकोलाई डुरोव द्वारा शुरू किया गया था। हाल के वर्षों में इसकी सरलता, सार्वजनिक चैनलों की उपलब्धता और निजी वार्तालापों को एन्क्रिप्ट करने की क्षमता ने इसे वैश्विक पटल पर अभूतपूर्व लोकप्रियता दिलाई। यह असहमति की आवाज का प्रतीक बन चुका है।
उदाहरण के तौर पर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी आक्रमण के विरुद्ध अपने लोगों को एकजुट करने के लिए इस मैसेंजर का सहारा लिया। हांगकांग के प्रदर्शनकारियों ने दमनकारी कानूनों के खिलाफ आंदोलन में टेलीग्राम का उपयोग किया, जबकि बेलारूस के लोकतंत्र समर्थकों ने चुनावी अनियमितताओं के विरोध के लिए इसी मंच पर निर्भर रहे।
टेलीग्राम पर आतंकवाद का काला साया
दूसरी तरफ, टेलीग्राम के अपेक्षाकृत कम नियोजित डिजिटल क्षेत्र ने उग्रवादियों को व्यापक लोगों तक पहुंचने, खुद को प्रचारित करने, ब्रांडिंग करने और प्रचार फैलाने की शक्ति प्रदान की है। आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे आतंकी समूहों तथा हमास व हिजबुल्लाह जैसे कट्टर संगठनों ने अपना संवाद इसी ऐप पर स्थानांतरित कर लिया है। इनके उद्देश्यों में नए सदस्यों की भर्ती, धन संग्रह, हिंसा भड़काना और कानून प्रवर्तन की निगाहों से छिपकर आतंकी कार्रवाइयों का आयोजन शामिल है।
2015 में टेकक्रंच सम्मेलन के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा के समय टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद जैसी बुराइयों के भय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है गोपनीयता का अधिकार। उनके इस बयान के मात्र दो महीने बाद आईएसआईएस ने फ्रांस में अपना सबसे घातक हमला किया, जिसमें 130 निर्दोषों की मौत हो गई और 350 से ज्यादा लोग घायल हुए। फ्रांसीसी जांच में पाया गया कि हमले की योजना और समन्वय में टेलीग्राम और व्हाट्सएप का उपयोग किया गया था।
पेरिस हमलों के बाद टेलीग्राम ने अपना रवैया बदला और आईएसआईएस के सार्वजनिक चैनलों, बॉट्स तथा चैट्स को हटाने का आश्वासन दिया। चरमपंथी खतरों से निपटने वाले गैर-लाभकारी वैश्विक संगठन काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट (सीईपी) की फरवरी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआईएस का प्रचार टेलीग्राम पर अभी भी मौजूद हैं, हालांकि यह सीमित और अस्थिर तरीके से संचालित हो रहा है।
इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स की हालिया जांच से उजागर हुआ कि टेलीग्राम की गोपनीयता विशेषताएं अपराधियों और आतंकवादियों को बड़े पैमाने पर संगठित होने तथा जांच एजेंसियों से बचने में सहायता प्रदान करती हैं।



