BJYM ने फूंका राहुल गांधी का पुतला, BJP प्रदेश अध्यक्ष हाउस अरेस्ट! तेलंगाना में भारी बवाल
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल गिरने के बाद तेलंगाना में सियासत गरमा गई है। BJP प्रदेश अध्यक्ष रामचंदर राव नजरबंद, BJYM ने फूंका राहुल गांधी का पुतला। पढ़ें पूरी खबर।

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इस घटना को महिलाओं के अधिकारों का हनन बताते हुए राज्यभर में तीखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। तेलंगाना भाजपा ने दावा किया है कि उसके प्रदेश अध्यक्ष को नजरबंद कर दिया गया है।
तेलंगाना में भाजपा का विरोध और नेताओं की नजरबंदी
संसद में बिल पास न हो पाने का सीधा असर तेलंगाना की राजनीति पर देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा कांग्रेस को इसका मुख्य जिम्मेदार मान रही है। तेलंगाना भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि उनके प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव को शनिवार को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। वह मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के आवास के बाहर कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले थे।
'काला दिन' करार दिया
रामचंदर राव ने शुक्रवार रात को 'काला दिन' बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को विधायिका और लोकसभा में उनके उचित प्रतिनिधित्व से वंचित कर दिया है। उन्होंने राज्य की महिलाओं से आह्वान किया कि वे कांग्रेस नेताओं को इस अन्याय के लिए भगा दें।
राहुल गांधी का पुतला फूंका
इससे पहले शुक्रवार शाम को हैदराबाद में भाजपा की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का पुतला फूंका और कांग्रेस के रुख की कड़ी निंदा की।
संसद में क्या हुआ? (बिल गिरने का मुख्य कारण)
केंद्र सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ है। सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया था जिसे दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण शुक्रवार को लोकसभा में खारिज कर दिया गया।
विधेयक और वोटिंग का गणित
यह बिल 2029 के आम चुनावों से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के लिए लाया गया था। यह तीन बिलों के पैकेज का हिस्सा था, जिसमें परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल भी शामिल थे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया था। बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिससे यह बिल चूक गया।
पक्ष और विपक्ष की अलग-अलग दलीलें
बिल के गिरने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
कांग्रेस, TMC, DMK, और SP समेत विपक्ष का तर्क है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे इसे परिसीमन और जनगणना की शर्तों से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि महिला कोटा तुरंत लागू किया जाए। राहुल गांधी ने विपक्ष के रुख का बचाव करते हुए कहा कि यह बिल महिला सशक्तिकरण के बारे में नहीं था, बल्कि परिसीमन के माध्यम से भारत के चुनावी ढांचे को बदलने का एक प्रयास था। प्रियंका गांधी और शशि थरूर जैसे कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका वोट लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए था, न कि महिला आरक्षण का विरोध करने के लिए।
सरकार का तर्क
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए उन पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के ऐतिहासिक अवसर को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने इस कदम को "नारी शक्ति का अपमान" बताया। शाह ने चेतावनी दी कि भविष्य के चुनावों में विपक्ष को महिलाओं के "क्रोध का सामना" करना पड़ेगा।
ज्ञात हो कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही पास हो चुका है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है, लेकिन इसका लागू होना पूरी तरह से परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर है।
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