सीट शेयरिंग पर तेजस्वी यादव का VIP को अंतिम ऑफर, मुकेश सहनी ने दिखाए तेवर
मुकेश सहनी पहले नीतीश कुमार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रह चुके हैं। NDA से अलग होने के बाद से वे लगातार अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने में जुटे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की नामांकन की अंतिम तारीख में अब सिर्फ कुछ ही घंटे बचे हैं, लेकिन महागठबंधन (RJD–Congress–Left–VIP) में सीट बंटवारे को लेकर संकट गहराता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने गठबंधन के भीतर 24 सीटों की मांग रखी है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राजद (RJD) ने उन्हें सिर्फ 18 सीटें देने का प्रस्ताव दिया है।

राजद सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया है कि 18 सीटों से ज्यादा नहीं दी जा सकतीं। गठबंधन की ओर से सहनी को यही आखिरी ऑफर बताया गया है। अगर सहनी मान जाते हैं तो महागठबंधन की सीट डील जल्द फाइनल हो सकती है, लेकिन अगर वे अलग राह चुनते हैं तो गठबंधन में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है।
2018 में गठित मुकेश सहनी की पार्टी का आधार बिहार के मछुआरा और नाविक समुदायों में है। सहनी सीट बंटवारे के समय कड़े मोलभाव के लिए जाने जाते हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने पहले महागठबंधन के साथ रहकर बाद में सीटों से असंतुष्ट होकर NDA का दामन थाम लिया था। NDA के साथ रहते हुए उन्होंने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 पर जीत दर्ज की, लेकिन बाद में उनके तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए जिससे उनकी पार्टी लगभग खाली हो गई।
हाल ही में मुकेश सहनी ने कहा था कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो वे उपमुख्यमंत्री बनेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या सहयोगी उन्हें स्वीकार करेंगे तो उन्होंने कहा, “अगर कुछ लोग तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री मानने को तैयार नहीं, तो क्या बिहार बिना मुख्यमंत्री के चलेगा? अगर तेजस्वी मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो मैं उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं?”
मुकेश सहनी ने यह भी कहा कि भाजपा ने भी उन्हें उपमुख्यमंत्री के लिए योग्य बताया था, जिससे वे राजनीतिक रूप से दोनों पक्षों के लिए अहम खिलाड़ी बन गए हैं।
मुकेश सहनी पहले नीतीश कुमार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रह चुके हैं। NDA से अलग होने के बाद से वे लगातार अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने में जुटे हैं।
महागठबंधन सूत्रों का कहना है कि अगर सहनी आखिरी समय में गठबंधन छोड़ते हैं तो कई सीटों पर तीन-कोने की टक्कर बन सकती है, जिससे RJD को नुकसान हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सहनी पिछली बार की तरह पलटी मारेंगे या इस बार गठबंधन में बने रहकर सौदेबाजी जीतेंगे।



