POSH नियमों को ठेंगा, नफरती माहौल; TCS नासिक केस में NCW ने 50 पेज की रिपोर्ट में बयां किए डरावने हालात

Pramod Praveen भाषा, मुंबई
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राष्ट्रीय महिला आयोग की समिति ने पीड़ितों, आंतरिक समिति (आईसी) के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों से बातचीत की और 50 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 25 से अधिक सिफारिशें शामिल हैं।

POSH नियमों को ठेंगा, नफरती माहौल; TCS नासिक केस में NCW ने 50 पेज की रिपोर्ट में बयां किए डरावने हालात

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक इकाई में व्यापक यौन उत्पीड़न, डराना-धमकाना और 'पॉश' अधिनियम का शून्य अनुपालन पाया है। आयोग ने महाराष्ट्र सरकार को सौंपी गई एक तथ्यान्वेषी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। आयोग ने सोमवार को कहा कि उसने कई महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर के निर्देश पर गठित तथ्यान्वेषी समिति ने 18 और 19 अप्रैल को नासिक का दौरा किया था। समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी के सिन्हा, उच्चतम न्यायालय की वकील मोनिका अरोड़ा और एनसीडब्ल्यू की वरिष्ठ समन्वयक लीलावती शामिल थीं।

समिति ने पीड़ितों, आंतरिक समिति (आईसी) के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों से बातचीत की और 50 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 25 से अधिक सिफारिशें शामिल हैं। यह रिपोर्ट आठ मई को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि नासिक इकाई में ''गंभीर रूप से परेशान करने वाला और विषाक्त कार्य वातावरण'' पाया गया, जहां ''व्यापक यौन उत्पीड़न'' और पद के दुरुपयोग के आरोप सामने आए। समिति के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने टीसीएस नासिक पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था और वे युवा महिला कर्मचारियों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करते थे।

कर्मचारियों को ‘हिंदू विरोधी टिप्पणियों’ का सामना करना पड़ा

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि महिला कर्मचारियों को धार्मिक अपमान और ''हिंदू विरोधी टिप्पणियों'' का सामना करना पड़ा, और उन पर धार्मिक मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। समिति ने इसे ''कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का विशिष्ट मामला'' बताते हुए कहा कि महिलाओं को धमकी, पीछा करने और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, कई महिला कर्मचारी शिकायत करने से डरती थीं क्योंकि उन्हें नौकरी खोने और पेशेवर परिणाम भुगतने का डर था। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि नासिक कार्यालय का नियंत्रण कुछ व्यक्तियों-दानिश, तौसीफ और रजा मेमन-के हाथों में था, जिन्हें अश्विनी चैनानी का संरक्षण प्राप्त था।

'पॉश' अधिनियम के तहत कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं

रिपोर्ट में कहा गया कि आंतरिक शिकायत समिति (आईसी) ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 या 'पॉश' अधिनियम के तहत कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और कार्यस्थल पर जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं चलाए गए। समिति ने इसे ''शून्य अनुपालन'' बताते हुए कहा कि यह केवल अनुपालन की कमी नहीं, बल्कि ''शासन की विफलता'' भी है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि 'पॉश' अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे

रिपोर्ट में सुरक्षा संबंधी खामियों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें कहा गया कि कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा कार्यस्थल पर निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि उसने संबंधित प्राधिकरणों और टीसीएस प्रबंधन से उचित कार्रवाई और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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