तसलीमा नसरीन की हो गई कोलकाता वापसी, 19 साल बाद लौटीं; आगे क्या प्लान

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन 19 सालों तक दूर रहने के बाद अब भारत वापसी कर रहीं हैं। वह शुक्रवार दोपहर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचीं हैं। वह आने वाले दिनों में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकती हैं।

Taslima nasreen
पुस्तकों को लेकर विवादों में आईं लेखिका तसलीमा नसरीन को प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। फोटो- PTI

करीब 2 दशकों के बाद लेखिका तसलीमा नसरीन की कोलकाता में वापसी हो चुकी है। शुक्रवार को वह एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां बड़ी संख्या में लोग उनका स्वागत के लिए जुटे थे। एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही उन्होंने कहा था कि वापसी करना घर लौटने जैसा है। नसरीन अपनी पुस्तकों के चलते विरोध का सामना कर रहीं थीं। वह 1 अगस्त को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक कार्यक्रम में शामिल हो सकती हैं।

घर लौटने जैसा

नसरीन ने गुरुवार को कहा कि लंबे समय बाद अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति के लिए शहर लौटना 'अपने देश' में लौटने जैसा है। वह बुक 'द्विखंडितो' को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ दिया था। वर्ष 2007 के बाद कोलकाता में नसरीन की यह पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी। उस समय उनकी आत्मकथा के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण उन्हें वह शहर छोड़ना पड़ा था, जिसे उन्होंने बांग्लादेश छोड़ने के एक दशक बाद अपना घर बनाया था।

किताब पर लगा था बैन

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में नसरीन की किताब 'द्विखंडितो' (दो हिस्सों में बंटी) पर कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कारण प्रतिबंध लगा दिया था। नसरीन ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि उनके लिए कोलकाता केवल रहने की जगह नहीं थी, बल्कि एक ऐसा शहर था जिसने उन्हें अपनापन महसूस कराया और इतने वर्षों तक दूर रहने के बावजूद उनका पश्चिम बंगाल से जुड़ाव कम नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपने ही देश में लौट रही हूं। मेरे दिल में बंगाल कभी भी किसी सीमा या कंटीले तार की बाड़ से बंटा नहीं रहा। बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए अभी के लिए बंगाल का यही हिस्सा मेरा घर है।'

दुखी भी हुईं

उन्होंने कहा, 'मैं खुशी के साथ-साथ दर्द भी महसूस कर रही हूं। कोलकाता सिर्फ वह शहर नहीं था जहां मैं रहती थी; वहां मेरा घर, दोस्त और पाठक होने के साथ अपनापन था। मेरे जीवन के लगभग 19 साल मुझसे छीन लिए गए और घर वापसी उन खोए हुए सालों को वापस नहीं ला सकती। मैं किसी अजनबी या मेहमान की तरह नहीं लौट रही हूं। मैं एक ऐसी इंसान के तौर पर लौट रही हूं जिसने हमेशा खुद को बंगाल का ही हिस्सा माना है।'

उन्होंने कहा, 'मैंने कभी अपनी मर्ज़ी से कोलकाता नहीं छोड़ा, उस समय की पश्चिम बंगाल सरकार ने मुझे राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था। फिर भी, मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी कि एक दिन मैं लौटूंगी। साल-दर-साल बीते...लेकिन मेरे लिए दरवाजे बंद ही रहे।'

भारत का धन्यवाद

नसरीन ने कहा कि हालांकि वह भारतीय नागरिक नहीं हैं, लेकिन वह उन्हें दी गई शरण के लिए आभारी हैं। उन्होंने कहा, 'भले ही मैं भारत की नागरिक नहीं हूं, लेकिन मैं उस देश की उदारता से बहुत प्रभावित हूं जिसने मुझ जैसी सताई गई लेखक को शरण दी है। मुझे दिए गए समर्थन और सुरक्षा के लिए मैं पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार की तहे दिल से शुक्रगुजार हूं।'

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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