तमिलनाडु में जारी है सियासी खेल, AIADMK के एक और MLA ने दिया इस्तीफा; 2 दिन में 4 ‘विकेट’ डाउन

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Tamil Nadu Politics: अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बागी खेमे के चौथे विधायक ई सुबैया ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही 234 सदस्यीय सदन में विपक्षी दल अन्नाद्रमुक की संख्या 47 से घटकर 43 रह गई।

तमिलनाडु में जारी है सियासी खेल, AIADMK के एक और MLA ने दिया इस्तीफा; 2 दिन में 4 ‘विकेट’ डाउन

तमिलनाडु में सियासी खेल जारी है। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बागी खेमे के चौथे विधायक ई सुबैया ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही 234 सदस्यीय सदन में विपक्षी दल अन्नाद्रमुक की संख्या 47 से घटकर 43 रह गई। अंबासमुद्रम निर्वाचन क्षेत्र से विधायक ई सुबैया ने विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। अध्यक्ष ने बाद में इसे स्वीकार कर लिया। यह घटना अन्नाद्रमुक प्रमुख ईके पलानीस्वामी गुट के विधानसभा अध्यक्ष से 25 मई को इस्तीफा दे चुके तीन विधायकों के त्यागपत्र न स्वीकार करने के अनुरोध के ठीक एक दिन बाद हुई है। पलानीस्वामी गुट ने इन इस्तीफों में कथित कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए अध्यक्ष से अनुरोध किया था कि वे इन्हें स्वीकार न करें। पार्टी का दावा है कि तीनों विधायक इस्तीफा अधिसूचित होने से पहले ही सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो चुके थे।

सुबैया चौथे बागी विधायक

ई. सुबैया, सीवी. शणमुगम-एस. पी. वेलुमणि खेमे के चौथे विधायक हैं जिन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा कि यह कदम उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के हित में उठाया है। टीवीके में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया और कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिलना कोई पाप नहीं है। मौका मिला तो मिलूंगा। इस्तीफा देने के तुरंत बाद सुबैया टीवीके नेता एवं राज्य मंत्री एन आनंद के साथ नजर आए।

कांग्रेस ने जताई चिंता, टीवीके ने खारिज किए आरोप

इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस सांसद एस जोतिमणि ने तमिलनाडु में विधायकों की कथित 'खरीद-फरोख्त' पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सत्तारूढ़ टीवीके के ऐसे कदमों का समर्थन नहीं करना चाहिए, क्योंकि खुद कांग्रेस भी इस तरह के हथकंडों की शिकार रही है। हालांकि, टीवीके नेता एवं राजस्व मंत्री केए सेंगोत्तैयान ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

अध्यक्ष बोले- कानून के दायरे में काम कर रहा हूं

विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने स्पष्ट किया कि वे कानूनी ढांचे और अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रारूप में आने वाले इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं। इससे पहले अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ सचेतक अग्री एस. एस. कृष्णमूर्ति और राज्यसभा सदस्य आई. एस. इनबादुरई ने अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा तथा एस. जयकुमार के इस्तीफे स्वीकार न करने की अपील की थी। तीनों के इस्तीफे बाद में सरकारी राजपत्र में अधिसूचित कर दिए गए।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने वाली उनकी अर्जी अभी लंबित है। ऐसे में अध्यक्ष इन इस्तीफों को स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्तीफा देने के महज पांच मिनट के अंदर तीनों को टीवीके का लेमिनेटेड सदस्यता कार्ड थमा दिया गया।

सुबैया का इस्तीफा पहले लौटाया, फिर स्वीकार

सोमवार को इस्तीफा देने वाले कुमारवेल, सत्यभामा और जयकुमार बाद में टीवीके में शामिल हो गए थे, जिसे द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ने 'दलबदल' करार दिया। अध्यक्ष ने सुबैया का पहला इस्तीफा नियमों के अनुरूप न होने का हवाला देते हुए लौटा दिया था। इसके बाद सुबैया ने तुरंत हस्तलिखित इस्तीफा सौंपा, जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। टीवीके सूत्रों के अनुसार, तीनों पूर्व विधायकों को आगामी उपचुनावों में पार्टी टिकट दिए जाने की संभावना है। इन घटनाक्रमों के बाद शणमुगम-वेलुमणि खेमे ने अपनी बैठक बुला ली है।

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Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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