स्टालिन से लेकर विजय तक, तमिलनाडु में किसके पास कितनी ताकत और क्या हैं चुनौतियां

Mar 15, 2026 10:51 pm ISTNiteesh Kumar भाषा
share

एक्टर विजय राजनीति में बिल्कुल नए हैं। उन्हें इस बात की आलोचना का सामना करना पड़ता है कि वह फिल्मों में संवाद बोलने की तरह ही राजनीतिक भाषण देते हैं। फिलहाल वह अपनी पार्टी के इकलौते स्टार प्रचारक हैं।

स्टालिन से लेकर विजय तक, तमिलनाडु में किसके पास कितनी ताकत और क्या हैं चुनौतियां

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक, मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और टीवीके की विधानसभा चुनाव में परीक्षा होनी है। चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद DMK, AIADMK और अन्य राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी जीत का भरोसा जताया। द्रमुक के पदाधिकारी सलेम धरनिधरन ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के बाद से एमके स्टालिन का ध्यान केवल जनता के हित में काम करने पर रहा है। देशभर में राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसी योजनाएं लागू की जा रही हैं। अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवाई सत्यन ने कहा कि पार्टी प्रमुख पलानीस्वामी पहले ही करीब 200 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। चलिए जानते हैं कि तमिलनाडु में प्रमुख राजनीतिक दलों की ताकत, कमजोरी और चुनौतियां क्या हैं...

डीएमके की ताकत: द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन द्रविड़ शैली के शासन का दावा करके भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सुशासन के विपरीत राजनीतिक बढ़त बनाए रख सकते हैं। स्टालिन ने खुद को सामाजिक न्याय के समर्थक के रूप में स्थापित किया है। DMK की कल्याणकारी पहलें, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और परिवार की महिला मुखियाओं के लिए मासिक भत्ता, काफी लोकप्रिय हैं। सहयोगी दल कांग्रेस, एमडीएमके, वीसीके और वामपंथी दल सत्ताधारी द्रमुक का लगातार समर्थन कर रहे हैं।

कमजोरी: द्रमुक को वंशवादी शासन को बढ़ावा देने के लिए विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। स्टालिन के पुत्र व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि की विवादास्पद टिप्पणियों के चलते पार्टी को अक्सर भाजपा और अन्नाद्रमुक के हमलों का सामना करना पड़ता है।

अवसर: तमिलनाडु के औद्योगीकरण के लिए निवेश आकर्षित करने पर द्रमुक का ध्यान और युवाओं के लिए रोजगार के वादे से युवा मतदाताओं को लुभाने की क्षमता है। पार्टी को तमिल पहचान के लिए समर्थन की उम्मीद रहती है।

चुनौतियां: अभिनेता व टीवीके प्रमुख विजय का चुनावी राजनीति में प्रवेश DMK के लिए एक चुनौती पेश करता है। द्रमुक के अधूरे वादे (नीट को खत्म करना, पेट्रोल सब्सिडी) विवाद का मुख्य कारण बने हुए हैं।

AIADMK की ताकत: पलानीस्वामी पार्टी के निर्विवाद नेता के रूप में उभरे हैं, जबकि शीर्ष पद के दूसरे दावेदार, निष्कासित नेता ओ पन्नीरसेल्वम अब द्रमुक में शामिल हो गए हैं। दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन (जिन्हें प्यार से एमजीआर कहा जाता था) की ओर से स्थापित अन्नाद्रमुक को मछुआरे और अल्पसंख्यकों सहित सभी वर्गों में अपना समर्थन प्राप्त है। पार्टी की संगठनात्मक संरचना मजबूत है और इसके कार्यकर्ता बूथ स्तर पर भी सक्रिय हैं।

कमजोरी: पन्नीरसेल्वम का द्रमुक गठबंधन में शामिल होना अन्नाद्रमुक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी प्रेमलता विजयकांत के नेतृत्व वाली डीएमडीके को अपने साथ बनाए रखने में विफल रही, जो द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई है।

अवसर: भाजपा, वन्नियार समुदाय के व्यापक समर्थन वाली पीएमके और एएमएमके के साथ पार्टी का गठबंधन, द्रमुक के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर में उसे अधिक प्रभावी ताकत बनाता है। पलानीस्वामी का लगातार द्रमुक को राज्य से जुड़े मुद्दों पर घेरना अन्नाद्रमुक को चुनावी फायदा दे सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से चलाया जा रहा जोरदार प्रचार अभियान, जिसमें अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता एमजीआर और जयललिता की विरासत का आह्वान किया गया है और द्रमुक के परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाई गई है।

चुनौतियां: अभिनेता से नेता बने विजय की पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की क्षमता अन्नाद्रमुक के लिए कुछ हद तक प्रतिकूल भी साबित हो सकती है।

TVK की ताकत: फिल्म अभिनेता के तौर पर बड़ी संख्या में विजय के प्रशंसकों की संख्या उनकी पार्टी को लाभ दे सकती है। युवा मतदाता टीवीके के पक्ष में पलड़ा झुकाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कमजोरी: विजय राजनीति में बिल्कुल नए हैं। उन्हें इस बात की आलोचना का सामना करना पड़ता है कि वह फिल्मों में संवाद बोलने की तरह ही राजनीतिक भाषण देते हैं। फिलहाल वह अपनी पार्टी के इकलौते स्टार प्रचारक हैं।

अवसर: यह पार्टी युवा मतदाताओं और तकनीकी रूप से जागरूक समुदाय को टारगेट कर रही है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक जैसे पारंपरिक द्रविड़ दलों से ऊब चुके मतदाता टीवीके को पसंद कर सकते हैं।

चुनौतियां: करूर भगदड़ मामला टीवीके के लिए बड़ा झटका है, जिससे उसकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। पार्टी को अन्नाद्रमुक और द्रमुक जैसी स्थापित पार्टियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिनका संगठन मजबूत है।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar

पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।