दक्षिण के रण में मोदी की हुंकार, राहुल गांधी गायब! चुनाव से पहले ही दरक रहा कांग्रेस-DMK गठबंधन?

Apr 08, 2026 07:43 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नै
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तमिलनाडु चुनाव में पीएम मोदी के ताबड़तोड़ दौरे जारी हैं, वहीं राहुल गांधी ने अब तक प्रचार नहीं किया है। पुडुचेरी में राहुल और स्टालिन के बीच दिखी दूरी ने कांग्रेस-DMK गठबंधन में दरार की अटकलें तेज कर दी हैं। जानिए क्या है पूरी सियासी हलचल।

दक्षिण के रण में मोदी की हुंकार, राहुल गांधी गायब! चुनाव से पहले ही दरक रहा कांग्रेस-DMK गठबंधन?

तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर हैं। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तमिलनाडु में चुनाव प्रचार से दूरी राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।

पीएम मोदी का आक्रामक चुनाव प्रचार

पिछले दो महीनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा और अपने सहयोगी दलों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया है। उनका यह अभियान यहीं नहीं रुकने वाला है; पीएम मोदी 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा करने वाले हैं, जहां वे नागरकोइल में एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में विशाल जनसभा को संबोधित कर वोट मांगेंगे।

राहुल गांधी की गैरमौजूदगी और DMK के साथ रिश्तों पर सवाल

पीएम मोदी के इस ताबड़तोड़ प्रचार के ठीक विपरीत, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में एक बार भी चुनाव प्रचार नहीं किया है। उनकी इस अनुपस्थिति ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति की तुलना 2021 के विधानसभा चुनाव से कर रहे हैं। उस समय राहुल गांधी ने चुनाव से काफी पहले, जनवरी महीने में ही तीन दिवसीय दौरे के साथ तमिलनाडु में अपने चुनाव प्रचार का शंखनाद कर दिया था।

पुडुचेरी में दिखा दूरियों का असर

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, दोनों दलों के बीच तनाव का सबसे स्पष्ट संकेत सोमवार को पुडुचेरी में देखने को मिला। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में राहुल गांधी पुडुचेरी पहुंचे। उन्होंने वहां की जनता से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा, लेकिन उन्होंने अपने पूरे भाषण में सहयोगी पार्टी DMK और उसके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन एम.के. स्टालिन भी पुडुचेरी में मौजूद थे। लेकिन दोनों शीर्ष नेताओं के प्रचार का कार्यक्रम कुछ इस तरह से निर्धारित किया गया था कि दोनों का आमना-सामना ही न हो सके। राहुल गांधी ने जहां सुबह के समय अपना प्रचार अभियान चलाया, वहीं स्टालिन शाम को वहां पहुंचे।

सीट बंटवारे की खींचतान का नतीजा?

DMK के एक पदाधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, "राहुल ने अपने भाषण में एक बार भी स्टालिन के नाम का जिक्र नहीं किया।" इसके जवाब में स्टालिन ने भी राहुल गांधी के बारे में कोई बात नहीं की। राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि दोनों नेताओं के बीच यह दूरी दरअसल चुनाव से पहले सीट-बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच हुई खींचतान और मनमुटाव का सीधा नतीजा है। डीएमके सूत्रों की मानें तो उनकी तरफ से राहुल और स्टालिन की मुलाकात कराने की कोई कोशिश भी नहीं की गई थी।

पार्टियों की सफाई और आगामी योजना

गठबंधन में अनबन की इन खबरों के बीच, DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपनी-अपनी जनसभाओं की योजना बहुत पहले ही बना ली थी और आखिरी समय में एक संयुक्त रैली आयोजित करने के लिए शेड्यूल्स में बदलाव करना संभव नहीं था। हालांकि, उन्होंने यह दावा जरूर किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे।

इस बीच, राज्य के कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि राहुल गांधी के चुनाव प्रचार का कार्यक्रम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। लेकिन जो संभावित योजना बन रही है, उसके अनुसार राहुल गांधी असम, केरल और पुडुचेरी में पहले चरण के मतदान संपन्न होने के बाद तमिलनाडु का रुख करेंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, राहुल 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु का दौरा कर सकते हैं।

Amit Kumar

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