‘जनता को मूर्ख समझ रहे हैं CM’ थलपति विजय की करूर यात्रा पर DMK का तीखा हमला
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सी. जोसेफ के ऊपर डीएमके ने जमकर निशाना साधा है। विजय के आरोपों का जवाब देते हुए डीएमके नेता ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने लोगों की जान बचाने की कोशिश की थी, जबकि विजय केवल भीड़ बढ़ाने में लगे हुए थे।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की करूर यात्रा के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक गलियों में उबाल मचा हुआ है। करूर में भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्कालीन डीएमके सरकार पर जमकर हमला बोला था। अब इस हमले का डीएमके की तरफ से जवाब दिया गया है। DMK ने आरोप लगाया कि थलपति विजय न सिर्फ झूठा प्रचार कर रहे हैं, बल्कि जनता को भी मूर्ख समझ रहे हैं। बता दें, पिछले साल 27 सितंबर को विजय की रैली में भगदड़ मच गई थी। इसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी।
इस भगदड़ के 10 महीने बाद विजय मुख्यमंत्री बनकर करूर पहुंचे। यहां पर उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरियां, मृतकों की याद में मेमोरियल समेत तमाम ऐलान किए। इतना ही नहीं उन्होंने तत्कालीन डीएमके सरकार के ऊपर भी साजिश रचने का आरोप लगाया। विजय के इन आरोपों के बाद डीएमके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखी। डीएमके के वरिष्ठ नेता ने टी. के. एस इलंगोवन ने कहा कि इसमें कोई साजिश नहीं थी। वहां पर भगदड़ विजय की वजह से ही मची थी।
देरी से पहुंचे थलपति विजय, इसलिए मची भगदड़- DMK
उन्होंने बताया कि विजय को जल्दी पहुंचना चाहिए था। लेकिन वह भीड़ बढ़ने का इंतजार करते रहे। विजय वहां पर शाम को 7:30 बजे पहुंचे उस समय तक गर्मी की वजह से लोगों की हालत खराब हो चुकी थी। उन्होंने कहा, "सामान्य समझ रखने वाला इंसान भी यह जानता होगा कि बिना खाना और पानी के कोई भी ज्यादा देर तेज धूप में नहीं रह सकता। अगर किसी को इस हालत में बैठाया जाता है, तो वह बेहोश हो जाते हैं। करूर भगदड़ के बाद 100 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे। डीएमके सरकार ने डॉक्टरों को बुलाकर उनकी जान बचाई थी, लेकिन 41 लोगों को नहीं बचाया जा सका।
बेहोश लोगों की मदद नहीं की, बल्कि ऊपर से गुजरे TVK कार्यकर्ता- DMK
थलपति विजय पर पलटवार करते हुए डीएमके नेता ने कहा कि विजय वहां पर देरी से पहुंचे। इसकी वजह से लोग बेहोश हो गए। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि लोग बेहोश हो रहे हैं लेकिन इसके बाद भी रैली जारी रखी गई। कार्यकर्ता अपने नेता की एक झलक पाने के लिए बेताब थे। वह बेहोश लोगों के ऊपर पैर रखकर आगे बढ़ गए। किसी ने उनकी मदद नहीं की। इस वजह से यह और भी ज्यादा भयानक हो गया।
विजय के देरी के आने की वजह से भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसे संभालना मुश्किल हो गया। इतनी बढ़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात करना आसान नहीं है। यह कोई दंगा नहीं था और न ही कोई सोची समझी साजिश। यह हादसा भीषण गर्मी की वजह से हुआ है।
विजय के क्या आरोप?
27 सितंबर 2025 को हुई इस घटना पर विजय और डीएमके के अलग-अलग आरोप हैं। तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी डीएमके का कहना है कि विजय और उनकी पार्टी ने जानबूझकर भीड़ बढ़ाने के लिए देरी से कार्यक्रम शुरू किया। इसकी वजह से लोग वहां पर फंस गए और विजय के आने के बाद लोग उनकी तरफ बढ़े। इसकी वजह से मामला बिगड़ा और भगदड़ मच गई। इसमें 41 लोगों की मौत हो गई। वहीं दूसरी तरफ विजय का कहना है कि डीएमके सरकार ने जानबूझकर पुलिस की तैनाती कम की और वहां पर भगदड़ मच जाने का इंतजार किया।
शुक्रवार को भी विजय ने करूर पहुंचकर डीएमके के ऊपर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर तत्कालीन सरकार सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती थी। तो उन्हें रैली की इजाजत ही नहीं देनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने इजाजत दी और फिर सुरक्षा नहीं दी। इसी वजह से रैली में इतने लोगों की मौत हो गई थी।


