राहुल गांधी को झटका देंगे CM विजय? पिता की महत्वाकांक्षी योजना पर SC में क्यों भारी तकरार
सुनवाई को दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मौखिक रूप से केंद्र सरकार से कहा कि नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू नहीं की जानी चाहिए। यह बहुत बुरा है क्योंकि 9वीं क्लास में यह तनावपूर्ण होता है।

सुप्रीम कोर्ट में आज (गुरुवार, 16 जुलाई को) तमिलनाडु की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें राज्य सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य सरकरा को हर जिले में एक नवोदय विद्यालय खोलने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। जैसे ही इस केस की सुनवाई शुरू हुई, तो राज्य की ओर से पेश हुए ऐडिशनल सॉलिसिटर जनरल(ASG) ने फिलहाल इस मामले की सुनवाई टालने का अनुरोध किया और इस संबंध में पीठ को एक पत्र सौंपा।
इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा,"आपके यहाँ नवोदय विद्यालय होने ही चाहिए।" इस पर जवाब देते हुए ASG ने कहा, "अभी बातचीत चल रही है। इसलिए हम इस समय कुछ नहीं कहना चाहते।" इतना सुनते ही जस्टिस नागरत्ना ने फिर कहा,"सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। आपको सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी है। बाकी सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं। आप तमिलनाडु को इससे क्यों वंचित रख रहे हैं?"
केंद्र सरकार के स्कूलों को न रोकें
नवोदय विद्यालय समिति की तरफ से पेश हुए वकील ने इसी दौरान कोर्ट से कहा कि पिछले आदेश में कहा गया था कि 6 हफ़्ते के अंदर जरूरी जमीन मिल जानी चाहिए। अब वे 12 हफ़्ते और समय मांग रहे हैं। इस पर कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि तमिलनाडु के ASG ने निर्देश लेने के लिए कुछ समय मांगा है। मामले को अब 11 अगस्त को सुनवाई के लिए को लिस्ट करें। पीठ ने कहा, "हम आपको 3 हफ़्ते का समय देंगे।" इस पर और विस्तार से बात करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “उन्हें निर्देश लेने दें। अब वहां दूसरी सरकार (TVK) है। हमें नहीं पता कि उनकी पॉलिसी क्या है। हो सकता है कि आपकी अपनी शिक्षा प्रणाली आदि हो, लेकिन तमिलनाडु में केंद्र सरकार के स्कूलों को न रोकें।”
राजीव गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट था नवोदय विद्यालय
दरअसल, नवोदय विद्यालय तत्कालीन राजीव गांधी सरकार की एक अति महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा थी, जिसे 1986 की नई शिक्षा नीति के तहत देशभर के ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्रों के लिए खोला गया था। देश के करीब सभी राज्यों में नवोदय विद्यालय हैं लेकिन तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 40 साल बाद भी एक भी नवोदय विद्यालय नहीं हैं। इसकी मुख्य वजह राज्य सरकार की त्रि-भाषा नीति का विरोध और केवल दो-भाषा (तमिल और अंग्रेजी) नीति का समर्थन करना है। इतने वर्षों में तमिलनाडु में सिर्फ DMK और AIADMK की ही सरकारें रही हैं, इसलिए इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
नई TVK सरकार क्या करेगी?
अब जब राज्य में थलपति विजय की अगुवाई में नई TVK सरकार है, और उसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है। यहां तक कि कांग्रेस भी उस सरकार में शामिल है तो संभव है कि विजय सरकार इस मामले पर DMK और AIADMK से हटकर राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालयों के स्थापना को हरी झंडी दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और गांधी परिवार के लिए सुखद होगा क्योंकि राजीव गांधी के सपनों को तमिलनाडु में साकार होते देखा जा सकेगा। अगर विजय की सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस DMK की भी सहयोगी थी लेकिन उनकी सरकार में वह नवोदय विद्यालय नहीं खुलवा सकी। इसलिए मुख्यमंत्री विजय इस मामले में क्या फैसला लेते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


