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घर में पूजा की वजह से हुई लोगों की मौत? प्रशासन ने मूर्ति हटाई; HC क्या बोला

घर में पूजा की वजह से हुई लोगों की मौत? प्रशासन ने मूर्ति हटाई; HC क्या बोला

संक्षेप:

मद्रास हाई कोर्ट ने अंधविश्वास के आधार पर कार्रवाई करने के लिए राज्य प्रशासन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन जनता की आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता। अगर कोई अपने निजी आवास में पूजा पाठ कर रहा है, तो वह उसका अधिकार है।

Jan 05, 2026 04:21 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन अंधविश्वास या अवैज्ञानिक तथ्यों या जन आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति निजी आवास में शांतिपूर्ण तरीके से कोई पूजा पाठ कर रहा है, तो उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और न ही राज्य जनता के अंधविश्वास के आगे झुक सकता है।

मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आया यह मामला चेन्नई का था। इसमें कार्तिक नामक एक व्यक्ति ने अपने निजी आवास में हिंदू देवी शिवशक्ति दक्षेश्वरी और देवता विनायगर और वीरभद्रन की मूर्तियों की स्थापना की थी। इसके बाद आसपास के लोगों ने इलाके में हुई अस्वाभाविक मौतों के लिए इन मूर्तियों को जिम्मेदार माना और प्रशासन से शिकायत की। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मूर्तियों को वहां से हटा दिया, जिस पर यह मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।

इस मामले पर हाई कोर्ट ने तीन अप्रैल 2025 को आदेश सुनाते हुए प्रशासन के इस तर्क को खारिज कर दिया था। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई न तो कानून से समर्थित हैं और न ही भक्ति या विज्ञान के किसकी सिद्धांत से। अदालत ने कहा कि संविधान राज्य प्रशासन को जनता में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए बाध्य करता है।

इसके बाद अदालत ने कुछ प्रतिबंधों के साथ प्रशासन को मूर्ति वापस लौटाने का आदेश दिया था। हालांकि लंबे समय के बाद भी ऐसा नहीं हो सकता तो कार्तिक ने अवमानना का मामला दायर कर दिया।बकौल, कार्तिक प्रशासन ने अभी तक उनकी मूर्तियों को नहीं लौटाया है। इसके अलावा आसपास के लोगों ने भी मूर्ति की फिर से स्थापना करने की स्थिति में हिंसा का सहारा लेने की धमकी दी है।

अदालत में अपना पक्ष रखते हुए राज्य प्रशासन ने कहा कि याचिकाकर्ता को उस स्थान पर केवल आवास निर्माण की अनुमति थी। उसने बिना किसी अनुमति के निजी आवास को मंदिर में बदल दिया। जहां पर आधी रात में पूजा होती है, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों को परेशानी होती है।

इस पर न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने कहा कि मूर्तियां याचिकाकर्ता की ही हैं, ऐसे में उन्हें तत्काल लौटा देना चाहिए। इसके अलावा अगर प्रशासन को किसी अवैध निर्माण से शिकायत हैं तो उस पर अलग से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने दोहराया कि निजी परिसर में होने वाली पूजा कभी भी इस तरह से नहीं होना चाहिए कि उसकी वजह से सार्वजनिक व्यवस्था भंग हो।इसके अलावा अदालत ने राज्य प्रशासन को भी चेतावनी दी कि अंधविश्वास के आधार पर ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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