मैं राजनीति में आती ही नहीं; अब पछता रहीं TMC से चुनाव लड़ हारीं नेता, रेलवे जॉब गंवाई

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स्वप्ना के करीबियों का कहना है कि अब उनके सामने पैसों की भारी किल्लत खड़ी हो सकती है, क्योंकि उनके हाथ से रेलवे की नौकरी और विधानसभा चुनाव दोनों ही निकल चुके हैं। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं और इसी साल अगस्त में होने वाले एशियन गेम्स के लिए वो दो क्वालीफाइंग राउंड में भी हिस्सा नहीं ले पाईं।

मैं राजनीति में आती ही नहीं; अब पछता रहीं TMC से चुनाव लड़ हारीं नेता, रेलवे जॉब गंवाई

तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर हारने के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वालीं स्वप्ना बर्मन परेशान हैं। खबर है कि वह अपने राजनीति में आने के फैसले पर भी सवाल उठा रहीं हैं। खबर है कि हाल ही में उनके घर पर आग लग गई थी, जिसकी वजह साफ नहीं हो सकी है। साथ ही कहा जा रहा है कि चुनावी हार के बाद उनके रिश्तेदारों ने भी दूरी बनाना शुरू कर दी है।

घर में लगी आग

टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार रात बर्मन के घर में आग लग गई थी, जिसके चलते वह काफी ज्यादा परेशान हो गईं हैं। उनके आरोप हैं कि गुंडों ने घर में आग लगाई थी। शनिवार को वह जलपाईगुड़ी में कोतवाली पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं थीं। खास बात है कि उस दौरान उनके साथ टीएमसी का कोई भी नेता मौजूद नहीं था। खास बात है राजनीति में आने के चलते उन्हें रेलवे की नौकरी छोड़नी पड़ गई थी।

भाजपा से हारीं चुनाव

बर्मन ने रायगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। यहां उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के दिनेश सरकार से था। हालांकि, यहां उन्हें 21 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा था। शनिवार को ही तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ गोपी, प्रकाश सी बराईक और अष्टमी रॉय उनके घर पहुंचे थे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रकाश ने कहा, 'हमारे नेताओं के निर्देश पर महुआ गोपी और मैं स्वप्ना से मिले। चुनाव में कोई भी हार सकता है, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि स्वप्ना हमारे देश की संपत्ति हैं।'

क्या बोलीं स्वप्ना बर्मन

रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में टीएमसी में शामिल होने वालीं स्वप्ना को पार्टी ने खगेश्वर रॉय की जगह टिकट दिया था। उन्होंने कहा, 'परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं।' उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि राजनीति में इतना दर्द है। नहीं तो मैं राजनीति में आती ही नहीं।' रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चुनावी हार के बाद कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने उनसे दूरी बना ली है।

उन्होंने भविष्य को लेकर कहा, 'मैं हमेशा स्पोर्ट्स में रही हूं, लेकिन राजनीति अलग है। मुझे पता है कि कैसे संघर्ष करना है और सफल बनना है। मुझे सोचने दीजिए कि आने वाले दिनों में क्या करूंगी।'

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि खिलाड़ी आग की घटना के बाद से ही पार्टी से जुड़ी गतिविधियों से दूर रही हैं। कुछ टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि स्वप्ना उनके फोन का जवाब नहीं दे रही हैं।

स्वप्ना को हो सकती है आर्थिक परेशानियां

रिपोर्ट के अनुसार, स्वप्ना के करीबियों का कहना है कि अब उनके सामने पैसों की भारी किल्लत खड़ी हो सकती है, क्योंकि उनके हाथ से रेलवे की नौकरी और विधानसभा चुनाव दोनों ही निकल चुके हैं। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं और इसी साल अगस्त में होने वाले एशियन गेम्स के लिए वो दो क्वालीफाइंग राउंड में भी हिस्सा नहीं ले पाईं। इसका मतलब यह है कि अब उन्हें इस बड़े टूर्नामेंट में दोबारा खेलने के लिए कम से कम दो साल और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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