शुभेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की, पश्चिम बंगाल के नए CM के पास संपत्ति कितनी; कोई गाड़ी भी नहीं
कभी ममता बनर्जी के करीबी नेता रहे शुभेंदु अधिकारी 15 साल से सत्ता पर काबिज 'दीदी' को भवानीपुर से हराकर सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं। शुभेंदु अधिकारी अविवाहित हैं और उन्होंने अपनी संपत्ति करीब 85 लाख घोषित की है।

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वह सपना पूरा हो गया है, जिसके सच होने की कल्पना कुछ साल पहले तक भगवा दल के कार्यकर्ता भी नहीं करते थे। बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य में पार्टी के सबसे पुराने कार्यकर्ता माखनलाल सरकार तक की मौजूदगी में पद और गोपनीयता की शपथ ली। कभी ममता बनर्जी के करीबी नेता रहे शुभेंदु अधिकारी 15 साल से सत्ता पर काबिज 'दीदी' को भवानीपुर से हराकर सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं।
57 साल के शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर के अलावा नंदीग्राम से भी चुनाव जीते हैं, जहां उन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को मात देकर देशभर में चर्चा का विषय बन गए थे। कांग्रेस और टीएमसी के रास्ते भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी ने अपना जीवन पूरी तरह राजनीति और लोकसेवा के प्रति समर्पित रखा है। वह पूर्ववर्ती सीएम ममता बनर्जी की तरह अविवाहित हैं। शिशिर कुमार अधिकारी के बेटे शुभेंदु ने रबिंद्र भारती यूनिवर्सिटी से 2011 में एमए की डिग्री ली थी। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 85,87,600 रुपये घोषित की थी। जबकि उन पर किसी तरह का कर्ज नहीं है। अधिकारी पेशे से कारोबारी भी हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके पास कोई गाड़ी नहीं है।
कांग्रेस नेता के रूप में जीता पहला चुनाव
शुभेंदु अधिकारी के पास ना सिर्फ संगठन की अच्छी समझ है, बल्कि ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे होने की वजह से उनके पास सत्ता का भी अनुभव है। अधिकारी ने 31 साल की उम्र में पहला चुनाव जीता था, जब वह कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद चुने गए। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और 20 साल पहले 2006 में पहली बार कोंटाई साउथ सीट से पहली बार विधायक बने।
टीएमसी में कैसे बढ़ा कद
2007 में लेफ्ट शासन के दौरान जब नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ममता बनर्जी ने चर्चित आंदोलन हुआ किया तो शुभेंदु अधिकारी ही उनके कर्ताधर्ता थे। आंदोलन को धार देने का श्रेय अधिकारी को ही जाता है। टीएमसी में अधिकारी का कद इसके बाद तेजी से बढ़ा और उन्हें 2009 में पार्टी ने संसद भेजने का फैसला किया। अधिकारी तामलुक सीट से सांसद चुने गए। 2016 में एक बार फिर नंदीग्राम सीट से विधायक चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में मंत्री बने।
फिर भाजपा में रचा इतिहास
शुभेंदु अधिकारी 2020 में ममता बनर्जी से नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें ममता बनर्जी के खिलाफ उतार दिया। नंदीग्राम सीट पर हुई चर्चित जंग में अधिकारी ने 10 साल की सीएम ममता बनर्जी को हराकर खलबली मचा दी और पश्चिम बंगाल में ममता के खिलाफ सबसे मजबूत चेहरे के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। यही वजह है कि 2026 में एक बार फिर उन्होंने ममता बनर्जी को चुनौती दी और वह भी उनके गढ़ भवानीपुर में। नतीजा फिर वही हुआ और शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा का पहला सीएम बनकर इतिहास रच दिया है।
लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
सुधीर झा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार और संपादकीय नेतृत्वकर्ता हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में LiveHindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित 8 राज्यों की कवरेज संभालने वाली स्टेट टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे राजनीति, अपराध और प्रशासन से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज से लेकर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तक, तथ्य-आधारित और संतुलित पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
15 सालों का अनुभव
सुधीर झा ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। दैनिक आज समाज और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल, न्यूजट्रैक और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क के अनुभव ने उनकी विश्लेषणात्मक समझ को और व्यापक बनाया। डिजिटल पत्रकारिता में उन्हें होमपेज मैनेजमेंट, लाइव इवेंट कवरेज (लोकसभा चुनाव, केंद्रीय बजट), हाइपरलोकल रिपोर्टिंग और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल में विशेषज्ञता प्राप्त है।
विश्वसनीय खबरों का लेखन
सुधीर झा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होमपेज मैनेजमेंट, लाइव इवेंट कवरेज (जैसे लोकसभा चुनाव और केंद्रीय बजट), हाइपरलोकल रिपोर्टिंग और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल में विशेषज्ञता रखते हैं। उनकी संपादकीय शैली में स्पीड और वेरिफिकेशन का संतुलन प्रमुख है। वे जमीनी स्रोतों, स्ट्रिंगर्स और रिपोर्टर्स के साथ समन्वय कर एक्सक्लूसिव और इम्पैक्टफुल स्टोरीज पर फोकस करते हैं। वे प्रत्येक खबर में मल्टी-सोर्स वेरिफिकेशन, सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय शामिल करने पर जोर देते हैं। सुधीर झा न्यूज राइटिंग में विश्वसनीयता और निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखते हैं। उनकी संपादकीय प्राथमिकता सार्वजनिक हित, निष्पक्षता और तथ्यपरकता है। सुधीर झा का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है।
शिक्षा और सम्मान
सुधीर झा ने कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘Digi Journo of the Year 2024–25’ और ‘Digital Content Award 2023–24’ से सम्मानित किया जा चुका है। इससे पहले उन्हें 'हम से सीखो' विशेष कैंपेन के लिए भी सम्मानित किया गया है।
विशेषज्ञता
राजनीति, अपराध और प्रशासनिक मामलों की गहन व तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग
ब्रेकिंग न्यूज मैनेजमेंट और मल्टी-स्टेट हाइपरलोकल कवरेज लीडरशिप
डिजिटल होमपेज ऑप्टिमाइजेशन और रियल-टाइम कंटेंट स्ट्रेटेजी
लाइव इवेंट कवरेज (लोकसभा चुनाव, केंद्रीय बजट) और विश्लेषणात्मक लेखन
मल्टी-सोर्स वेरिफिकेशन, संपादकीय गुणवत्ता नियंत्रण और टीम मेंटरशिप


