RSS की विचारधारा पर चलेगी शुभेंदु अधिकारी की सरकार, विभागों के बंटवारे से दिए संकेत
शुभेंदु अधिकारी ने कृषि विभाग की जिम्मेदारी दूध कुमार मंडल और पंचायती राज व ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को सौंपी है।

Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने अपने मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसके साथ ही यह संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार का शासन मॉडल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधार पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने कई अहम विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि शिक्षा, कृषि और पंचायत जैसे नीतिगत विभागों की कमान आरएसएस की मजबूत पृष्ठभूमि वाले नेताओं को सौंपी गई है।
बंगाल के मुख्यमंत्रियों द्वारा कई विभाग अपने पास रखने की परंपरा रही है। हालांकि, प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विपरीत जहां सब कुछ अकेले ममता बनर्जी पर निर्भर था, भाजपा एक कैडर-आधारित और सांगठनिक रूप से बेहद मजबूत पार्टी है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी द्वारा इन महत्वपूर्ण विभागों को अपने पास रखना उनके बढ़ते कद और प्रशासनिक पकड़ को दर्शाता है।
शुभेंदु के पास कौन-कौन से विभाग
गृह और पर्वतीय मामले- यह विभाग राज्य की कानून-व्यवस्था और IPS कैडर को नियंत्रित करता है।
भूमि और भूमि सुधार - भाजपा सरकार का मुख्य ध्यान बंगाल में बड़े निवेश आकर्षित करने पर है। इसके लिए पिछली ममता सरकार की हस्तक्षेप न करने वाली भूमि नीति को बदलकर एक आक्रामक और उद्योग-अनुकूल नीति अपनाई जाएगी। इसलिए मुख्यमंत्री ने यह जिम्मेदारी सीधे अपने हाथों में ली है।
ऊर्जा - केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटर योजना को घरेलू उपभोक्ताओं के विरोध के बावजूद लागू करने की बड़ी चुनौती इस विभाग के पास होगी। इसके अलावा, देवचा-पचामी कोयला खदान परियोजना के भविष्य पर भी फैसला लेना होगा।
सूचना एवं सांस्कृतिक मामले- यह विभाग सरकार की योजनाओं का प्रचार करने और मीडिया के साथ समन्वय स्थापित कर बंगाल को एक निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में पेश करने का काम करेगा।
इन मंत्रालयों के अलावा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्मिक और प्रशासनिक सुधार, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं भी अपने पास ही रखी हैं।
RSS से आने वाले नेताओं को नीतिगत विभागों की कमान
भाजपा के वैचारिक एजेंडे को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संघ पृष्ठभूमि वाले दिग्गजों को तैनात किया गया है। स्कूली शिक्षा को फालाकाटा से विधायक दीपक बर्मन को दिया गया है। इसके अलावा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा सूरी सीट से विधायक जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के पास है।
संघ का मानना है कि बंगाल में 34 साल के वामपंथी शासन के कारण स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों पर मार्क्सवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव है, जिसे पिछली ममता सरकार ने भी नहीं बदला था। अब भाजपा सरकार इन पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।
शुभेंदु अधिकारी ने कृषि विभाग की जिम्मेदारी दूध कुमार मंडल और पंचायती राज व ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को सौंपी है।
बंगाल की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने और उद्योगपतियों का भरोसा जीतने के लिए आर्थिक मोर्चों पर अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। रासबिहारी सीट से जीतकर आए स्वपन दासगुप्ता को वित्त मंत्री बनाया गया है। पश्चिम बंगाल के वित्तीय संकट को दूर करना और केंद्रीय योजनाओं के फंड का सही आवंटन की जिम्मेदारी होगी। इसी तरह तापस रॉय को वाणिज्य और उद्योग विभाग मिला है। बंद पड़ी फैक्ट्रियों को पुनर्जीवित करना और नए औद्योगिक घरानों को बंगाल लाने की चुनौती होगी।
नौकरशाहों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही वित्त और उद्योग जैसे बड़े विभाग स्वपन दासगुप्ता और तापस रॉय को दिए गए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद इन दोनों विभागों के कामकाज और नीतिगत फैसलों पर पैनी नजर रखेंगे।
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Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
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हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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