डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट; घुसपैठियों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप वाली नीति पर चल रहे शुभेंदु अधिकारी

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घुसपैठियों के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी डोनाल्ड ट्रंप की तरह की नीति अपना रहे हैं। उन्होंने तीन चरण में घुसपैठियों को वापस भेजने के निर्देश दिए हैं। पहले चर में पता लगाया जाएगा, दूसरे में उन्हें हटाया जाएगा और फिर डिपोर्ट कर दिया जाएगा।

डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट; घुसपैठियों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप वाली नीति पर चल रहे शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घुसपैठियों के खिलाफ एकदम डोनाल्ड ट्रंप की तरह अभियान शुरू किया है। उनके अभियान के तीन चरण हैं, डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट। अधिकारी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि वे घुसपैठियों की पहचान करें और उन्हें वापस भेजने का इंतजाम करें। बता दें कि घुसपैठियों को वापस भेजना बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल था।

पश्चिम बंगाल के गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग की विदेशी शाखा द्वारा 23 मई को जारी आदेश में जिलाधिकारियों को ''गिरफ्तार किए गए विदेशियों'' और ''रिहा किए गए विदेशी कैदियों'' को तब तक निरुद्ध रखने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए कहा गया, जब तक कि निर्वासन की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं।

डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट

इसे हालांकि, केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक प्रक्रियात्मक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह निर्देश मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से एक सख्त घुसपैठ-विरोधी ढांचा पेश करने और यह घोषणा करने के कुछ दिनों बाद आया है कि उनकी सरकार ने ''पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो'' की नीति अपनाई है। ''पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो'' एक ऐसा वाक्यांश है, जो घुसपैठ और सीमा राजनीति पर भाजपा की बंगाल की शब्दावली में लंबे समय से समाहित है।

सरकार के निर्देश में कहा गया, ''इस संबंध में, यह अनुरोध किया जाता है कि जिले में गिरफ्तार किये गए विदेशियों के साथ-साथ निर्वासन/स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे रिहा विदेशी कैदियों के लिए निरुद्ध केंद्र स्थापित करने के लिए पहल/उचित कार्रवाई की जाए।'' इस आदेश की प्रतियां पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक, सभी पुलिस आयुक्तालयों, पुलिस अधीक्षकों और कोलकाता स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को भी भेजी गईं। अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित निरुद्ध केंद्र उन लोगों के लिए अस्थायी पारगमन सुविधाओं के रूप में कार्य करेंगे, जिन्हें अवैध रूप से रहने के संदेह में हिरासत में लिया जाएगा और उन विदेशी नागरिकों के लिए जिनकी निर्वासन की प्रक्रिया चल रही है।

केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, संदिग्ध अवैध विदेशियों को उनकी राष्ट्रीयता और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान 30 दिनों तक ऐसे केंद्रों में रखा जा सकता है। नागरिकता निर्धारण पर अंतिम निर्णय जिला मजिस्ट्रेट या समकक्ष स्तर के अधिकारी लेंगे। इस मसौदे में बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह, एक केंद्रीय पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना और अंततः पहचाने गए अवैध अप्रवासियों को प्रत्यावर्तन के लिए सीमा अधिकारियों को सौंपने की भी परिकल्पना की गई है।

सीएम अधिकारी ने लगाया दूसरा जनता दरबार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को यहां सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में अपना दूसरा 'जनता दरबार' आयोजित कर लोगों की शिकायतें सुनीं। सुबह से ही पार्टी कार्यालय के बाहर सैकड़ों लोगों की कतार लग गई, जिनमें बड़ी तादाद में नौकरी के इच्छुक युवा भी थे। मुख्यमंत्री से सीधे मिलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे इन लोगों को प्रवेश पर्ची दी गई।

अधिकारी ने नौ मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद के रूप में शपथ लेने के बाद जनता की समस्याएं सुनने के लिए नियमित 'जनता दरबार' आयोजित करने का फैसला किया था। उनका पहला 'जनता दरबार' 18 मई को हुआ था।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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