परिवार को धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने वाला आरोपी SC पहुंचा, अदालत ने दी बड़ी राहत

एएनआई, नई दिल्ली
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जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने यह अंतरिम आदेश जारी किया, और इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को लेकर नोटिस भी जारी किया, जिसमें MP फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।

SC stays proceedings against man accused of forcing family to convert

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उस शख्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी, जिस पर मध्य प्रदेश में एक परिवार को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोप है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी खुद को हिंदू धर्म का अनुयायी बताता है। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता हरमन टेलर के वकील ने तर्क दिया कि FIR शिकायतकर्ता के पति के कथित तौर पर इस्लाम अपनाने के लगभग आठ साल बाद दर्ज की गई थी।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने यह अंतरिम आदेश जारी किया, और इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को लेकर नोटिस भी जारी किया, जिसमें MP फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।

आरोपी ने किया खुद के हिंदू होने का दावा

यह मामला उस व्यक्ति की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR से जुड़ा है जिसने कथित तौर पर टेलर के प्रभाव में आकर इस्लाम अपना लिया था। वकील ने बताया कि टेलर और उसका परिवार हिंदू धर्म को मानते हैं और उन्होंने इस बात के सबूत भी रिकॉर्ड पर रखे थे।

पुलिस ने टेलर के कहने पर वापस लिया था मामला

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि धर्म परिवर्तन के बाद, पति ने अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे को भी इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करना शुरू कर दिया, और उसने ऐसा टेलर के कहने पर किया था। पुलिस के पास दर्ज शिकायत के आधार पर, पुलिस ने टेलर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया और बाद में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

हाई कोर्ट ने रद्द नहीं की आपराधिक कार्रवाई

इसके बाद, टेलर ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द कराने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया। जहां उसने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि मैंने शिकायतकर्ता (पत्नी) या उसके बेटे का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की थी।

शख्स पर लगे आरोप बेहद गंभीर किस्म के: कोर्ट

हालांकि इसके बाद भी हाई कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया और पाया कि शख्स पर लगे आरोप गंभीर किस्म के लग रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा उठाए गए मुद्दे ट्रायल (मुकदमे) के दौरान विचार करने योग्य हैं।

शिकायतर्ता को कथित अपराध से जुड़े अरा र

इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत हैं जो उसे कथित अपराध से जोड़ते हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता और उसके नाबालिग बेटे के बयानों में विशेष रूप से शिकायतकर्ता के परिवार पर दबाव डालने में याचिकाकर्ता की भूमिका का जिक्र है। हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर टेलर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

Sourabh Jain

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Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

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