पत्नी के आधार कार्ड ने खोली पोल! पवन खेड़ा के 'फर्जीवाड़े' को सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ लिया

Apr 15, 2026 02:40 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए तेलंगाना HC से मिली ट्रांजिट जमानत पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र का फायदा उठाने के लिए 'आधार कार्ड' के कथित फर्जीवाड़े पर सख्त टिप्पणी की है।

पत्नी के आधार कार्ड ने खोली पोल! पवन खेड़ा के 'फर्जीवाड़े' को सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ लिया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा उन्हें दी गई 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' पर रोक लगा दी है। यह पूरा मामला असम पुलिस द्वारा खेड़ा के खिलाफ दर्ज मानहानि और जालसाजी की एफआईआर से जुड़ा है। इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड से की गई कथित छेड़छाड़ को गंभीरता से लिया।

क्या है आधार कार्ड का 'फर्जीवाड़ा'?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ के सामने यह खुलासा हुआ कि पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट से जमानत लेने के लिए वहां का 'स्थानीय निवासी' होने का दावा किया था। इसके लिए उन्होंने जो आधार कार्ड प्रस्तुत किया, उसी ने उनकी पोल खोल दी। दरअसल जस्टिस माहेश्वरी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान खेड़ा द्वारा पेश किए गए नोट में कहा गया था कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रह रही हैं। इस पर असम पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि खेड़ा ने जो आधार कार्ड रिकॉर्ड पर रखा है, उसके अनुसार उनकी पत्नी दिल्ली में रहती हैं। मेहता ने इसे अपनी पसंद का कोर्ट चुनने की कोशिश और कानून का दुरुपयोग बताया।

मेहता ने कहा, 'उन्होंने (पवन खेड़ा ने) जो आधार कार्ड रिकॉर्ड पर रखा है, उसमें दिखाया गया है कि उनकी पत्नी दिल्ली में रह रही हैं। उन्होंने ये दोनों दस्तावेज पेश किए हैं। इससे यह साबित होता है कि उनकी पत्नी भी दिल्ली में ही रहती हैं। वह कभी-कभी यात्रा करते रहते हैं। क्या यही कानून है? कोई भी व्यक्ति 10 अलग-अलग राज्यों में संपत्तियां खरीद या किराए पर ले सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी राज्य के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करे।'

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

SG की दलीलों पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का गलत फायदा उठाया गया है। कोर्ट ने कहा कि जमानत के लिए जो आधार कार्ड इस्तेमाल किया गया, उसके सामने वाले हिस्से यानी फ्रंट पर पवन खेड़ा का नाम था, लेकिन पिछले हिस्से यानी बैकसाइड पर उनकी पत्नी का पता दर्ज था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक फर्जी या छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज के आधार पर तेलंगाना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अनुचित लाभ उठाया गया, जबकि कथित अपराध असम के गुवाहाटी में हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा 10 अप्रैल को दी गई राहत (अग्रिम जमानत) पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने 3 हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर पवन खेड़ा अधिकार क्षेत्र वाले असम के न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के इस 'स्टे ऑर्डर' का वहां की सुनवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

क्या है इस मामले का बैकग्राउंड?

यह विवाद पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ था। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेश में उनकी अघोषित संपत्ति है। इसके जवाब में असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया।

पुलिस की दबिश और जमानत

7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम खेड़ा के दिल्ली आवास पर पहुंची थी, लेकिन वह वहां नहीं मिले। इसके बाद खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से 10 अप्रैल को जस्टिस के. सुजाना की बेंच ने उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी थी, ताकि वह संबंधित अदालत (असम) में जा सकें। असम पुलिस ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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