Hindi NewsIndia NewsSupreme Court says Prolonged separation between husband wife to cruelty to both
पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक अलगाव क्रूरता के समान, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक अलगाव क्रूरता के समान, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

संक्षेप:

पीठ ने कहा कि कई मामलों में इस अदालत के सामने ऐसी स्थितियां आई हैं, जहां पक्षकार काफी समय से अलग रह रहे हैं। यह लगातार माना गया है कि सुलह की कोई उम्मीद के बिना लंबे समय तक अलग रहना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता के बराबर है।

Dec 16, 2025 12:42 am ISTNiteesh Kumar भाषा
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सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी की तलाक अर्जी को सोमवार को मंजूरी दे दी। इसने कहा कि सुलह की कोई उम्मीद न होने के चलते दंपति का लंबे समय तक एक-दूसरे से अलग रहना दोनों पक्षों के प्रति क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान संज्ञान लिया गया कि 4 अगस्त 2000 को शादी के बंधन में बंधने वाले दंपति ने विवाह के महज दो साल बाद 2003 में मुकदमेबाजी शुरू कर दी और विचारों में मतभेद के कारण 24 वर्षों से अलग रह रहे हैं। पीठ ने कहा कि अदालतों की ओर से बार-बार प्रयास किए जाने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कोई सुलह-समझौता नहीं हुआ।

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पीठ ने कहा कि कई मामलों में इस अदालत के सामने ऐसी स्थितियां आई हैं, जहां पक्षकार काफी समय से अलग रह रहे हैं। यह लगातार माना गया है कि सुलह की कोई उम्मीद के बिना लंबे समय तक अलग रहना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता के बराबर है। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘यह न्यायालय भी इस बात से सहमत है कि वैवाहिक विवाद से जुड़े मुकदमों का लंबे समय तक लंबित रहना विवाह को केवल कागजों तक सीमित कर देता है। ऐसे मामलों में जहां मुकदमा काफी समय से लंबित है, पक्षों के बीच संबंध तोड़ देना ही पक्षों और समाज के हित में है। इसलिए न्यायालय की राय है कि पक्षों को राहत दिए बिना वैवाहिक मुकदमे को अदालत में लंबित रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा।’

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शिलांग निवासी दंपति के विवाह को भंग करने का आदेश दिया। उसने शिलांग के अतिरिक्त उपायुक्त के आदेश को बरकरार रखा और उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने पत्नी की इस दलील पर विवाह को बहाल किया था कि उसका पति को स्थायी रूप से त्यागने या छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। पीठ ने कहा कि इस मामले में पति-पत्नी वैवाहिक जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को लेकर दृढ़ मत रखते हैं। उन्होंने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ तालमेल बैठाने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने कहा, ‘उनका आचरण एक-दूसरे के प्रति क्रूरता के समान है। इस न्यायालय का मत है कि दो व्यक्तियों से जुड़े वैवाहिक मामलों में यह समाज या न्यायालय का काम नहीं है कि वह यह तय करे कि किस पति या पत्नी का दृष्टिकोण सही है या गलत। उनका एक-दूसरे के साथ सामंजस्य स्थापित करने से इनकार करना ही एक-दूसरे के प्रति क्रूरता के समान है।’

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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