पति ने पत्नी से 13 दिन तक नहीं की बात, फिर… सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद, क्या आया फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी पति को बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान वैवाहिक जीवन में होने वाले कलह को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या के मामले में उसके पति को बरी करते हुए कहा है कि मतभेद और अनबन शादीशुदा जिंदगी का एक हिस्सा हैं और इसकी वजह से कुछ समय के लिए बातचीत बंद होना भी सामान्य है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि महज कुछ दिनों तक पत्नी से बात न करने के आधार पर किसी पति को 'क्रूरता' का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने निचली अदालत और मद्रास हाईकोर्ट के फैसलों को पलट दिया। इससे पहले HC ने पति को IPC की धारा 498A के तहत दोषी माना था और तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। मामला तब शुरू हुआ जब शख्स की पत्नी ने अपने मायके में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। महिला के परिजनों ने आरोप लगाया कि शादी के समय लड़की के माता-पिता ने 3 लाख रुपये नगद, 20 सोने के गहने और अन्य सामान दिए थे। कथित तौर पर पति अक्सर पत्नी से मायके से मारपीट करता था। वहीं महिला के ससुराल वाले उस पर और दहेज लाने का दबाव भी डालते थे।
नहीं की थी बातचीत
शिकायत के मुताबिक पति ने पत्नी को उसकी मर्जी के खिलाफ मायके जाने पर भी फटकार लगाई थी। वहीं उसने फोन पर पत्नी से बात करने से मना कर दिया था। जानकारी के मुताबिक महिला की मौत से पहले दोनों के बीच 13 दिनों से बातचीत बंद थी। आरोप लगाया गया है कि बात न करने की वजह से महिला आहत हुई और उसने सुसाइड कर लिया। इस मामले में पति, सास-ससुर और दो देवरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498A और 304B के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ बात न करने को क्रूरता का दर्जा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा, "बिना किसी पुख्ता और ठोस सबूत के, सिर्फ 13 दिनों तक मृतक से बात न करने को 'क्रूरता' के दायरे में नहीं रखा सकता।" सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह देखा जाना बेहद जरूरी है कि क्या पति के कदम या व्यवहार की गंभीरता ऐसी थी जिससे कोई भी महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाए, या उससे उसके मानसिक स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा या चोट पहुंचने की आशंका हो। SC ने सबूतों के अभाव में पति को बरी कर दिया।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
और पढ़ें

