Hindi NewsIndia NewsSupreme Court says does not mind criticism of the judiciary but there should not be sweeping allegations
न्यायपालिका पर इस तरह आरोप तो मत लगाइए… सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया आगाह, क्या मामला?

न्यायपालिका पर इस तरह आरोप तो मत लगाइए… सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया आगाह, क्या मामला?

संक्षेप:

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि कोर्ट को न्यायालय की आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन आलोचना उचित तरीके से की जानी चाहिए।

Nov 20, 2025 05:01 am ISTJagriti Kumari भाषा
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि अदालत को न्यायपालिका की आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन किसी भी तरह के व्यापक आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा को आगाह किया है। प्रदीप शर्मा ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जजों पर कुछ आरोप लगाए थे।

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पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील से कहा, ‘‘आपने कई अच्छे मुद्दे उठाए हैं, लेकिन आप किसी पर भी व्यापक आरोप नहीं लगा सकते। हमें न्यायपालिका की आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह उचित तरीके से होनी चाहिए।’’ वहीं वकील ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय ने शर्मा द्वारा बिना शर्त माफी मांगने पर अवमानना ​​का आरोप हटाते हुए, पौधारोपण का निर्देश दिया है। जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि चंडीगढ़ को हरियाली की सख्त जरूरत है और यह अच्छी बात है कि उच्च न्यायालय ने ऐसा आदेश दिया।

इससे पहले कोर्ट के आदेश में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता के वकील ने सूचित किया है कि 15 सितंबर 2025 के आदेश का सम्मान करते हुए, याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी और एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था। उदारता का परिचय देते हुए, हाईकोर्ट ने बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली और याचिकाकर्ता को अवमानना ​​की कार्यवाही से मुक्त कर दिया है।’’

शीर्ष अदालत ने उस याचिका का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें शर्मा ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इससे पहले 15 सितंबर को, शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की इस दलील पर गौर किया कि शर्मा को अपने परिवार के सदस्यों द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष हलफनामे के माध्यम से दिये गए वचन का उल्लंघन करते हुए, 2023 से 2025 के बीच ईमेल भेजने की अपनी गलती का सचमुच में पछतावा है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने 29 मई 2023 के अपने आदेश में इस वचन को विधिवत रूप से पुनः प्रस्तुत किया था।

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कामत ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के साथ-साथ इस न्यायालय में भी हलफनामे के माध्यम से बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार और इच्छुक है। पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी ईमेल सार्वजनिक नहीं किया गया था, फिर भी याचिकाकर्ता एक वचन देना चाहता है कि वह भविष्य में ऐसा नहीं करेगा।’’

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari
जागृति ने 2024 में हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल सर्विसेज के साथ अपने करियर की शुरुआत की है। संत जेवियर कॉलेज रांची से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन करने बाद, 2023-24 में उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। खबरें लिखने के साथ साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और अर्थव्यवस्था की खबरों को पढ़ना पसंद है। मूल रूप से रांची, झारखंड की जागृति को खाली समय में सिनेमा देखना और सिनेमा के बारे में पढ़ना पसंद है। और पढ़ें
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