Hindi NewsIndia NewsSupreme Court says Can not Election Commission decide on citizenship initial stage
क्या चुनाव आयोग तय कर सकता है किसी की नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट में हुई जोरदार बहस

क्या चुनाव आयोग तय कर सकता है किसी की नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट में हुई जोरदार बहस

संक्षेप:

जज ने पूछा, 'आप कहते हैं कि निर्वाचन आयोग के पास किसी व्यक्ति को विदेशी या गैर-नागरिक घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन, वह मौजूदा दर्जे पर संदेह कर सकता है और मामले को अधिकारियों के पास भेज सकता है।'

Dec 09, 2025 10:04 pm ISTNiteesh Kumar भाषा
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूछा कि क्या चुनाव आयोग को किसी संदिग्ध नागरिक के मामले में जांच करने से रोका गया है और क्या ये जांच प्रक्रिया उसके संवैधानिक अधिकार से बाहर है? चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जज जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार सहित कई राज्यों में मतदाता सूचियों के SIR के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। जज बागची ने संबंधित कानून और इस दलील का संज्ञान लिया कि आयोग नागरिकता के मुद्दे पर निर्णय नहीं ले सकता, क्योंकि उसका काम सिर्फ यह विचार करना होता है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक है, उसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है। वह उसी निर्वाचन क्षेत्र में रहता है। यह भी दलील दी गई थी कि नागरिकता के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग निर्णय नहीं कर सकता, क्योंकि केवल केंद्र सरकार की ओर से गठित विदेशी न्यायाधिकरण ही इस संबंध में फैसला ले सकता है।

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जज ने पूछा, ‘आप कहते हैं कि निर्वाचन आयोग के पास किसी व्यक्ति को विदेशी या गैर-नागरिक घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन, वह मौजूदा दर्जे पर संदेह कर सकता है और मामले को उपयुक्त प्राधिकारियों के पास भेज सकता है। यह तथ्य कि वह (नागरिकता पर) संदेह कर सकता है, एक तरह से यह सुनिश्चित करता है कि उसके पास इस संबंध में निर्णय लेने की शक्ति है। क्या निर्वाचन आयोग नागरिकता के शुरुआती चरण पर निर्णय नहीं ले सकता?’ याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि SIR प्रक्रिया क्षेत्राधिकार के अतिक्रमण और प्रक्रियागत अनियमितताओं से ग्रसित है। इसमें नागरिकता साबित करने का भार असंवैधानिक रूप से आम मतदाताओं पर डाला गया है।

वकील ने दिए कौन से तर्क

पीठ ने सीनियर वकील शादान फरासत, पीसी सेन और SIR का विरोध करने वाले कई याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों की दलीलें सुनीं। फरासत ने मतदाता सूचियों को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक और वैधानिक ढांचे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 324 से 329, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के साथ मिलकर एकल संवैधानिक संहिता बनाते हैं, जिसे अस्थायी संसद के रूप में कार्य करने वाली संविधान सभा की ओर से अधिनियमित किया गया था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 326 के तहत वयस्क मताधिकार के लिए केवल तीन शर्तों की पूर्ति आवश्यक है और वे हैं - भारतीय नागरिकता, 18 वर्ष की आयु और विशिष्ट अयोग्यताओं का अभाव।

वकील फरासत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम इन आधारों को प्रतिबिंबित करता है, लेकिन मतदाता सूची से बाहर करने के लिए नए आधार नहीं दे सकता। उन्होंने कहा, ‘निर्वाचन आयोग को मुझे मतदाता सूची में शामिल होने से रोकने या सूची से बाहर करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर आयोग को मेरी नागरिकता पर संदेह है, तो इसकी जांच केवल जिला मजिस्ट्रेट को भेजी जानी चाहिए। नागरिकता पर निर्णय केवल केंद्र सरकार या विदेशी न्यायाधिकरण ही ले सकता है।’ उन्होंने कहा कि वैधानिक प्रावधान के तहत, मतदाता सूची में पहली बार शामिल किए जाने के लिए नागरिकता कोई पूर्व शर्त नहीं है। गैर-नागरिक साबित करने का भार हमेशा राज्य पर होता है।

SC की बेंच ने क्या किया सवाल

पीठ ने पूछा, ‘निर्धारण और जांच में अंतर है। क्या निर्वाचन आयोग संदिग्ध नागरिकों के मामले में जांच कर सकता है? आयोग यह नहीं कह रहा है कि उसे किसी को गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार है... लेकिन क्या यह आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर होगा, उसकी इस संवैधानिक शक्ति को ध्यान में रखते हुए कि वह ऐसी प्रक्रिया कर सकता है, जो जांच संबंधी प्रकृति की हो, मसलन जहां (मतदाता सूची में) समावेशन अत्यधिक संदिग्ध लगता हो। इस तरह यह प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाता है।’

एससी की बेंच ने कहा, ‘नागरिकता एक संवैधानिक अनिवार्यता है। आरओपीए की धारा 19 अनुच्छेद 325 के आधार पर अधिनियमित की गई है। एक अवैध प्रवासी लंबे समय से यहां रह रहा है। मान लीजिए 10 साल से अधिक समय से... तो क्या उसे सूची में बने रहना चाहिए? यह कहना कि निवास और आयु से संतुष्ट होने पर नागरिकता मान ली जाती है, गलत होगा। यह निवास या आयु पर निर्भर नहीं है, क्योंकि नागरिकता एक संवैधानिक आवश्यकता है।’ पीठ मामले की सुनवाई 11 दिसंबर को जारी रखेगी।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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