बंदी के फिर से अपराध में लिप्त होने की आशंका हिरासत के लिए पर्याप्त आधार नहीं, SC की बड़ी टिप्पणी

Jan 11, 2026 09:24 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने हैदराबाद की एक महिला की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया, जिसे 1986 के तेलंगाना 'खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम' कानून के तहत तस्करी में लिप्त पाया गया था।

बंदी के फिर से अपराध में लिप्त होने की आशंका हिरासत के लिए पर्याप्त आधार नहीं, SC की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी की यह आशंका कि यदि किसी बंदी को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह लोक व्यवस्था के लिए प्रतिकूल अपराधों में फिर से लिप्त हो सकता है, एहतियाती हिरासत का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने हैदराबाद की एक महिला की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया, जिसे 1986 के तेलंगाना 'खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम' कानून के तहत तस्करी में लिप्त पाया गया था। पीठ ने यह फैसला इस आधार पर लिया कि हिरासत के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि लोक व्यवस्था पर किस प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था या पड़ने की आशंका थी, जिसके कारण बंदी को हिरासत में रखा गया था।

पीठ ने आठ जनवरी के अपने आदेश में कहा, ‘‘इस प्रकार, हिरासत में लेने वाले अधिकारी की ओर से सिर्फ यह आशंका कि यदि बंदी को जमानत पर रिहा कर दिया जाता है, तो वह इस प्रकार के अपराधों में लिप्त हो सकती है, जो लोक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह होंगे, उसे निवारक हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं होगा।’’ पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को भी रद्द कर दिया और कहा कि बंदी को 1986 के कानून की धारा 2 (एफ) के तहत ‘‘नशीली दवाओं की तस्कर’’ पाया गया।

पीठ ने कहा कि कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट का भी यह मानना था कि बंदी ने जमानत के लिए आवेदन दिया है, जो लंबित है और यह आशंका थी कि यदि बंदी जमानत प्राप्त करने में सफल हो जाती है, तो वह अवैध गतिविधियों में लिप्त हो जाएगी।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।


यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत कई पुरस्कार जीते हैं।

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