इंसानों से ज्यादा कुत्तों पर आ रहीं याचिकाएं, सुप्रीम कोर्ट की बेंच किस बात पर हैरान

Jan 06, 2026 05:04 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में दाखिल हो रही याचिकाओं की बाढ़ पर हैरानी जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि इंसानों से संबंधित मामलों में भी आमतौर पर इतनी बड़ी संख्या में अंतरिम आवेदन नहीं आते…

इंसानों से ज्यादा कुत्तों पर आ रहीं याचिकाएं, सुप्रीम कोर्ट की बेंच किस बात पर हैरान

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में दाखिल हो रही याचिकाओं की बाढ़ पर हैरानी जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि इंसानों से संबंधित मामलों में भी आमतौर पर इतनी बड़ी संख्या में अंतरिम आवेदन नहीं आते, जितने कुत्तों के मुद्दे पर आ रहे हैं। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि बुधवार को सभी पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब दो वकीलों ने उनके सामने आवारा कुत्तों से संबंधित मामला उठाया। एक वकील ने बताया कि उन्होंने इस मामले में अंतरिम आवेदन दाखिल किया है। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि इंसानों के मामलों में भी आमतौर पर इतनी याचिकाएं नहीं आतीं।

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बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई

बेंच ने आगे कहा कि आवारा कुत्तों का मामला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आएगा। जब दूसरे वकील ने स्थानांतरण याचिका का जिक्र किया तो शीर्ष अदालत ने कहा कि बुधवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई होगी और बेंच सभी वकीलों की दलीलें सुनेगी। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन जजों वाली विशेष बेंच बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में 'चिंताजनक वृद्धि' देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर 2025 को आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसे पकड़े गए कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें उठाया गया था।

हाईवे और एक्सप्रेसवे से आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश

अदालत ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों तथा अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि खेल परिसरों समेत संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति न केवल प्रशासनिक उदासीनता दर्शाती है, बल्कि इन परिसरों को रोकने योग्य खतरों से सुरक्षित करने में 'प्रणालीगत विफलता' को भी उजागर करती है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे। यह अदालत राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्टों के संबंध में पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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