Hindi NewsIndia NewsSupreme Court Raises Question on Madras High Court Says Something is Wrong
कुछ तो गड़बड़ है, मद्रास हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, क्या है मामला?

कुछ तो गड़बड़ है, मद्रास हाई कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, क्या है मामला?

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई सवाल उठाए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि चेन्नई बेंच ने करूर से जुड़े मामले में दखल क्यों दिया, उसने एक ऐसी याचिका पर पूरी तरह से तमिलनाडु पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कैसे किया।

Dec 12, 2025 03:43 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की लिस्टिंग और सुनवाई में अपनाए जा रहे नियमों पर मद्रास हाई कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने करूर भगदड़ के बाद हाई कोर्ट की भूमिका पर अपनी जांच तेज कर दी है और कहा है कि जिस तरह से हाई कोर्ट ने इस त्रासदी से जुड़े मामलों को संभाला, उसमें कुछ गड़बड़ है। इस घटना में एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान 41 लोगों की जान चली गई थी।

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जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सब्मिट की गई एक रिपोर्ट की जांच करने के बाद यह टिप्पणी की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया था कि करूर मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आने के बावजूद हाई कोर्ट की चेन्नई बेंच ने इस मामले को कैसे हैंडल किया। रिपोर्ट को पार्टियों के बीच सर्कुलेट करने का आदेश दिया गया, और बेंच ने उनसे जवाब मांगा।

रजिस्ट्रार जनरल की एक्सप्लेनेशन को देखने के बाद, बेंच ने कमेंट किया: "हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है। यह सही बात नहीं है जो हाई कोर्ट में हो रही है... रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई सवाल उठाए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि चेन्नई बेंच ने करूर से जुड़े मामले में दखल क्यों दिया, उसने एक ऐसी याचिका पर पूरी तरह से तमिलनाडु पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कैसे किया, जिसमें सिर्फ राजनीतिक रैलियों के लिए गाइडलाइंस मांगी गई थीं और हाई कोर्ट की दो बेंचों से विरोधाभासी आदेश क्यों आए, जबकि मदुरै बेंच ने उसी दिन जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर करने से मना कर दिया था।

तमिलनाडु की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी. विल्सन ने कोर्ट से कहा, "हमारे हाई कोर्ट में, जो भी मामला कोर्ट के सामने आता है, उससे जुड़ी हर बात पर वे आदेश देते हैं..." इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने जवाब दिया, "अगर कोई प्रैक्टिस गलत है।" बेंच ने 13 अक्टूबर के अपने आदेश के एक हिस्से में बदलाव करने की मौखिक रिक्वेस्ट को भी ठुकरा दिया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय समिति करेगी। आदेश के अनुसार, जस्टिस रस्तोगी को तमिलनाडु कैडर के दो सीनियर आईपीएस अधिकारियों को चुनना होगा जो उस राज्य के मूल निवासी न हों।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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