बंद करो ‘वैवाहिक महाभारत’, SC ने वकील को सिखाया सबक; 10 साल से परेशान पत्नी को दिलवाए 5 CR
सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर शादी को रद्द कर दिया कि अब इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है और पत्नी के उत्पीड़न को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सभी लंबित मुकदमों को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई करते हुए एक तिकड़मबाज वकील पति को न सिर्फ उसके कानूनी दांवपेच के लिए सबक सिखाया बल्कि उससे उसकी पत्नी को 5 करोड़ रुपये का एकमुश्त गुजारा भत्ता भी दिलवाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान इस केस को वैवाहिक महाभारत करार दिया और इसे बंद करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि वकील पति ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए उस पर और उसकी पैरवी करने वाले वकीलों पर कुल 80 मुकदमे दर्ज कर रखे हैं। इसके साथ ही अदालत ने वकील पति द्वारा दायर 80 से अधिक मामलों को निरस्त कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि क्या?
बार एंड बेंच के मुताबिक, इस दंपति का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था लेकिन 2016 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद विवाद लगातार बढ़ता गया। पति, जो पेशे से वकील है, ने पत्नी, उसके परिजनों और यहां तक कि उसके वकीलों के खिलाफ भी विभिन्न अदालतों और मंचों पर 80 से अधिक मुकदमे दायर कर दिए। इसे देखते हुए पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला अब “सारी सीमाएं पार कर चुका है” और इसे समाप्त करना ही न्यायोचित होगा।
5 करोड़ का एकमुश्त निपटान
अदालत ने पति के आचरण को “दुर्भावनापूर्ण, जिद्दी और प्रतिशोधपूर्ण” करार दिया और कहा कि उसने अपनी कानूनी जानकारी का दुरुपयोग किया है। अदालत ने विवाद को समाप्त करने के लिए पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को 5 करोड़ रुपये की राशि एकमुश्त दे। यह राशि गुजारा भत्ता, बच्चों के पालन-पोषण का खर्च और लंबित मुकदमों के खर्च को शामिल करते हुए अंतिम समझौते के रूप में निर्धारित की गई है।
बच्चों की कस्टडी और अन्य आदेश
अदालत ने दो नाबालिग बच्चों की पूर्ण कस्टडी मां को सौंपते हुए पिता को मासिक मुलाकात का अधिकार दिया। साथ ही, यह भी निर्देश दिया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद ही पत्नी मुंबई स्थित ससुर के स्वामित्व वाले फ्लैट को खाली करे। पत्नी अपने ससुर के फ्लैट में रह रही थी जिसकी कीमत पांच करोड़ है। सुप्रीम कोर्ट ने पति को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह भविष्य में पत्नी, उसके परिवार या वकीलों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं करेगा। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वकील पति मामले में अपनी पैरवी खुद कर रहा था।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


