CJI को गाली देने वाले शख्स को सुप्रीम कोर्ट ने किया माफ, कहा- उसकी हालत देखते हुए...
सुप्रीम कोर्ट में एक शख्स ने सीजेआई को गाली दी और सामने बैठी बेंच पर पेपर उछाल दिए। हालांकि, कोर्ट ने उसे माफ करते हुए कोई भी ऐक्शन लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उसकी हालत का हवाला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिकाकर्ता ने सीजेआई को गाली देते हुए जज की बेंच के सामने कागजात उछाल दिए, जिससे बवाल मच गया। हालांकि, कोर्ट ने उसकी हालत को देखते हुए उसके खिलाफ कोई भी ऐक्शन नहीं लेने का फैसला किया है। यानी कि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक तरह से माफ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब यह मामला उठाया गया तो मिस्टर प्रबल प्रताप जो इस मामले में दोनों पिटीशनर्स की तरफ से पिटीशनर-इन-पर्सन के तौर पर पेश हुए थे, उन्होंने केस पेश करने के बजाय बेतुकी और असंसदीय बातें कहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, ''हालांकि, ऊपर बताए गए याचिकाकर्ता की हालत को देखते हुए, हम उनके खिलाफ कोई ऐक्शन लेने का प्रस्ताव नहीं रखते हैं। जहां तक इस केस के मेरिट का सवाल है, हमने रिकॉर्ड देखे हैं, हमें विवादित जजमेंट/ऑर्डर में दखल देने का कोई अच्छा आधार नहीं मिला। इसलिए, स्पेशल लीव पिटीशन खारिज की जाती है। सभी पेंडिंग एप्लीकेशन, जिसमें खुद पेश होने और बहस करने की परमिशन और पिटीशन फाइल करने की परमिशन के एप्लीकेशन भी शामिल हैं, उनका भी निपटारा कर दिया जाएगा।''
यह घटना जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से उसकी रिट याचिका खारिज हो जाने के बाद सु्प्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। यह मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत उसके आवेदन को एक निजी शिकायत में बदल दिए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा था।
'आप हमें आदेश दे रहे?'
जब इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई, तो याचिकाकर्ता ने पीठ पर एक असाधारण टिप्पणी करते हुए कहा, "न्यायिक सेवक महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के विकास नगर के सहायक पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का ऑर्डर दें।" इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायाधीश विश्वनाथन ने पूछा, "आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?"
सीजेआई के खिलाफ इस्तेमाल की अभद्र भाषा
इसके कुछ ही क्षणों बाद, बिना किसी उकसावे के, याचिकाकर्ता ने अदालती कक्ष के भीतर मामले के कागजात हवा में उछाल दिए और सीजेआई के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। हालात बिगड़ता देख न्यायालय के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे काबू में किया और अदालती कक्ष से बाहर ले गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीठ ने पूरी तरह से संयम बनाए रखा और इस आक्रोश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। याचिकाकर्ता को बाहर निकाले जाने के बाद, अदालत ने दिन की कार्यसूची में शामिल शेष मामलों की सुनवाई फिर से शुरू की।


