Hindi NewsIndia NewsSupreme Court on orders for CBI investigation such investigation should be done only as a last resort
जब मन किया तब CBI जांच का आदेश नहीं दे सकतीं अदालतें, सख्त हुआ SC; हाईकोर्ट का आदेश निरस्त

जब मन किया तब CBI जांच का आदेश नहीं दे सकतीं अदालतें, सख्त हुआ SC; हाईकोर्ट का आदेश निरस्त

संक्षेप: सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों को जांच सौंपना सामान्य प्रथा नहीं बल्कि अत्यधिक अपवाद की स्थिति होनी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन और संस्थागत मर्यादा बनी रहे।

Fri, 17 Oct 2025 07:39 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उच्च न्यायालयों और खुद को चेतावनी देते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश देना अंतिम उपाय होना चाहिए, न कि नियमित प्रक्रिया। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच का सहारा तभी लिया जाना चाहिए, जब अन्य सभी विकल्प समाप्त हो जाएं और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हों।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

जस्टिस जे. के. महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह आदेश “संदेह और अनुमानों” के आधार पर पारित किया था। अदालत ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट को वापस भेज दिया।

जस्टिस महेश्वरी ने निर्णय लिखते हुए कहा, “यह सुव्यवस्थित विधि है कि उच्च न्यायालय या यह न्यायालय सीबीआई जांच का आदेश सामान्य रूप से नहीं दे सकते। संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत यह एक असाधारण संवैधानिक शक्ति है, जिसका प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ ही किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि केवल इसलिए कि किसी पक्ष को राज्य पुलिस पर संदेह है या उसे निष्पक्ष जांच पर विश्वास नहीं है, सीबीआई जांच का आदेश देना उचित नहीं है। अदालत को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तुत सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध का संकेत देती हो और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता हो, या फिर मामला इतना जटिल या व्यापक हो कि उसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रभाव हों।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि यह तय करने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं कि कब सीबीआई जांच का आदेश दिया जा सकता है, लेकिन अदालतें यह कदम तब उठा सकती हैं जब मामला राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय महत्व का हो। दिलचस्प बात यह है कि जस्टिस महेश्वरी की ही अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने इसी हफ्ते तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना की जांच सीबीआई से कराने का अंतरिम आदेश दिया था।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में केंद्रीय एजेंसी पर “अनावश्यक बोझ” नहीं डाला जाना चाहिए। जस्टिस महेश्वरी ने कहा, “सीबीआई जांच का आदेश एक अंतिम उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। इसे तभी उचित ठहराया जा सकता है जब अदालत को यह विश्वास हो कि जांच की निष्पक्षता पर गंभीर खतरा है, या प्रक्रिया की अखंडता इतनी प्रभावित हो गई है कि यह न्यायपालिका या जनता के विश्वास को हिला सकती है।”

पीठ ने कहा कि ऐसे असाधारण हालात तब पैदा होते हैं जब जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह हो, उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता का संकेत मिले, या राज्य पुलिस की भूमिका से जनता में निष्पक्ष जांच की क्षमता को लेकर संदेह उत्पन्न हो। इस फैसले के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों को जांच सौंपना सामान्य प्रथा नहीं बल्कि अत्यधिक अपवाद की स्थिति होनी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन और संस्थागत मर्यादा बनी रहे।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।