सुधार के नाम पर हिंदू धर्म को खोखला नहीं कर सकते; CJI सूर्यकांत की पीठ ने ऐसा क्यों कहा
इस मुद्दे पर बहस के 10वें दिन 2018 में पांच जजों की संविधान पीठ द्वारा पारित फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने पक्ष रखना शुरू किया।

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ ने बुधवार के कहा कि सुधार के नाम पर न तो धर्म को खोखला किया जा सकता है और न ही सदियों से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाज और प्रथाओं के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। संविधान पीठ ने यह भी कहा कि ‘अदालतें सुधार के नाम पर धर्म की मूल संरचना को खत्म नहीं कर सकती हैं और आस्था तथा अंतरात्मा से जुड़े मुद्दों को न्यायिक बहस का विषय नहीं बनाया जा सकता।’
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली नौ जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर सहित देश के विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में पर महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार और प्रवेश पर प्रतिबंध से जुड़े मुद्दों पर बहस के दौरान ये मौखिक टिप्पणी की।
इस मुद्दे पर बहस के 10वें दिन 2018 में पांच जजों की संविधान पीठ द्वारा पारित फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने पक्ष रखना शुरू किया। 2018 में संविधान पीठ ने महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी।
इंदिरा जय सिंह ने पीठ से कहा कि अनुच्छेद 25(1) के तहत व्यक्तियों को दी गई धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों पर भारी पड़ेगी। उन्होंने जोर दिया अदालतें धार्मिक मामलों में पूरी तरह से हस्तक्षेप न करने का रवैया नहीं अपना सकतीं क्योंकि न्यायिक समीक्षा अंतर्निहित संवैधानिक शक्ति है। उनके अनुसार, संविधान एक जीवंत दस्तावेज है और मौलिक अधिकारों की व्याख्या अलग-थलग रहकर नहीं की जा सकती।
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