Hindi NewsIndia NewsSupreme Court modified the sentence of the 80 year old convict said the court should not be insensitive
सुप्रीम कोर्ट ने 80 वर्षीय दोषी की सजा में संशोधन किया; कहा- कोर्ट को असंवेदनशील नहीं होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने 80 वर्षीय दोषी की सजा में संशोधन किया; कहा- कोर्ट को असंवेदनशील नहीं होना चाहिए

संक्षेप:

हालांकि, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजरिया की पीठ ने उस व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, जिसने इस मामले में कुल छह साल तीन महीने की अवधि जेल में काटी है।

Jan 09, 2026 10:54 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालतों को असंवेदनशील नहीं होना चाहिए। इसी टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने 1992 के एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए 80 वर्षीय व्यक्ति की सजा में संशोधन करते हुए उसे पहले ही जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया।

हालांकि, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजरिया की पीठ ने उस व्यक्ति की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, जिसने इस मामले में कुल छह साल तीन महीने की अवधि जेल में काटी है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 भाग-दो के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इस समय अपीलकर्ता की आयु 80 वर्ष से अधिक है। चूंकि, अपीलकर्ता वृद्ध व्यक्ति है और अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर है, इसलिए इस अवस्था में उसे दोबारा जेल भेजना कठोर और अनुचित होगा। अदालतों से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वे असंवेदनशील हों।’’

अपीलकर्ता की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए, पीठ ने कहा कि उसकी अधिक उम्र और सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, उसकी सजा घटाकर उतनी की जाती है, जितनी वह पहले ही भुगत चुका है। पीठ ने कहा, ‘‘सजा में संशोधन के साथ यह अपील खारिज की जाती है।’’

एक निचली अदालत ने दिसंबर 1997 में अपीलकर्ता को अन्य लोगों के साथ हत्या सहित अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उस व्यक्ति ने उच्च न्यायालय में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उसकी दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखी थी, जिसके बाद उसने शीर्ष अदालत का रुख किया था।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।


यूपी-बिहार की पॉलिटिक्स से लेकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक खबरों को कवर करने का लंबा अनुभव है। पॉलिटिकल न्यूज में ज्यादा रुचि है और पिछले एक दशक में देशभर में हुए विभिन्न विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों को भी कवर किया है। लाइव हिन्दुस्तान के लिए मदन देश-विदेश में रोजाना घटित होने वाली खबरों के साथ-साथ पॉलिटिकल खबरों का एनालिसिस, विभिन्न अहम विषयों पर एक्सप्लेनर, ब्रेकिंग न्यूज, वायरल न्यूज आदि कवर करते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से लेकर मिडिल ईस्ट में असली वॉर तक की इंटरनेशनल खबरों पर लिखते-पढ़ते रहते हैं। पिछले एक दशक में पत्रकारिता क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मदन ने लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर, मंथली अवॉर्ड्स, पॉपुलर च्वॉइस, एचटी स्टार अवॉर्ड्स समेत कई पुरस्कार जीते हैं।

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