अंग्रेजी जानते हो, तब भी बोलना नहीं चाहते; सुप्रीम कोर्ट ने किस राज्य के लोगों के लिए कह दिया ऐसा?

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पति की तरफ से यह तर्क दिया गया कि पत्नी खुद विदेश में रहती है, इसलिए केस केरल में चले या पंजाब में, इससे उस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ।

Supreme Court Justice on Kerala people

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि केरल के लोग भले ही अंग्रेजी जानते हो, लेकिन तब भी बोलना नहीं चाहते। हालांकि इस दौरान उच्चतम न्यायालय ने यह मानने से भी इनकार कर दिया कि केरल में हर कोई अंग्रेजी जानता है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में महिला ने अपने पति द्वारा दायर कस्टडी और तलाक से जुड़े मामलों को केरल से पंजाब ट्रांसफर करने की मांग की थी।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में रह रही एक पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उसके पति ने केरल की अदालत में याचिका दायर की है जिससे उसे भाषा को लेकर काफी दिक्कत हो रही है। वहीं पति की ओर से पेश वकील ने इस ट्रांसफर याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील देते हुए कहा, “केरल में हर कोई अंग्रेजी जानता और समझता है।”

इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने टोकते हुए कहा, "हमें मत सिखाइए, वहां बहुत दिक्कत होती है। केरल में भले ही लोगों को अंग्रेजी आती हो, लेकिन वे तब भी अंग्रेजी में बात करना नहीं चाहते।" वकील ने आगे फिर कहा, “केरल में हर कोई अंग्रेजी जानता है। केरल एक लैंग्वेज-फ्रेंडली राज्य है।” हालांकि, SC ने स्पष्ट कहा कि भाषा को लेकर ऐसा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक इस जोड़े की शादी 2017 में हुई थी। वहीं 2023 में दोनों ब्रिटेन शिफ्ट हो गए, लेकिन वहां उनके रिश्तों में दरार आ गई। रिश्तों में खटास आने के बाद पति अपने नाबालिग बच्चे को लेकर भारत लौट आया और केरल की फैमिली कोर्ट में तलाक और बच्चे की कस्टडी के लिए मुकदमा दर्ज करा दिया। पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विदेश में रहती है और भारत में उसकी बूढ़ी मां इस केस को देख रही हैं। महिला के मुताबिक केरल की स्थानीय भाषा और अंग्रेजी की वजह से मां को अदालती कार्यवाही में हिस्सा लेने में दिक्कत आ रही है।

वहीं पति ने यह तर्क दिया कि क्योंकि पत्नी खुद विदेश में रहती है, इसलिए केस केरल में चले या पंजाब में, इससे उस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। साथ ही बच्चा भी पिछले 3 साल से केरल में ही रह रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस तर्क से सहमत नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि भाषा की बाधा के कारण पत्नी अब तक अपनी बात सही तरीके से अदालत के सामने नहीं रख पाई है, जो कि बच्चे की कस्टडी जैसे संवेदनशील मामले में बेहद जरूरी है। इसके बाद SC ने केस को केरल से लुधियाना की अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दे दिया।

Jagriti Kumari

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Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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