गुटखा शौकीनों ने लाल कर दिए सुप्रीम कोर्ट के कोने, अब अदालत को जारी करना पड़ा आदेश
सर्कुलर में कहा गया है, 'यह देखा गया है कि भवन में आने वाले कुछ लोगों को पान मसाला, गुटखा और तंबाकू आदि चबाने और दीवारों के कोनों, वॉशबेसिन और पीने के पानी की जगहों आदि पर थूकने की आदत है। इस आदत की वजह से…।

सुप्रीम कोर्ट परिसर में पान मसाला या तंबाकू थूके जाने को लेकर नया आदेश जारी किया गया है। अदालत ने परिसर में आने वाले किसी भी व्यक्ति से ऐसा नहीं करने की हिदायत दी है। साथ ही परिसर को साफ रखने में सहयोग करने की बात कही है। न्यायालय ने इस आदत के चलते होने वाले स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सर्कुलर में जिक्र किया है।
सर्कुलर में कहा गया है, 'यह देखा गया है कि भवन में आने वाले कुछ लोगों को पान मसाला, गुटखा और तंबाकू आदि चबाने और दीवारों के कोनों, वॉशबेसिन और पीने के पानी की जगहों आदि पर थूकने की आदत है। इस आदत की वजह से पानी की निकासी बंद हो जाती है और संक्रमण का खतरा बना रहता है, साथ ही भवन का उपयोग करने वाले अन्य लोगों को भी असुविधा होती है। इसलिए, सभी संबंधित लोगों को हिदायत दी जाती है कि वे परिसर में पान मसाला, गुटखा या तंबाकू आदि न थूकें और परिसर को साफ रखने में सहयोग करें।'
शुक्रवार को इन मामलों पर होगी सुनवाई
एआर रहमान के खिलाफ याचिका- सुप्रीम कोर्ट उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने एआर रहमान पर उनके परिवार की पुरानी रचना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
मणिपुर जातीय हिंसा- अदालत मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगी।
मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन- सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसमें 'मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन' को भंग करने का निर्णय लिया गया था।
लेखक के बारे में
Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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