समय रैना और चार पर 3-3 लाख का जुर्माना, रणवीर अलाहाबादिया को फटकार; सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्ती बरतते हुए समय रैना समेत कुल पांच कॉमेडियंस पर तीन-तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इनमें सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के नाम शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्ती बरतते हुए समय रैना समेत कुल पांच कॉमेडियंस पर तीन-तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इनमें सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के नाम शामिल हैं। इन सभी को दो हफ्ते के अंदर यह रकम जमा कराने का निर्देश दिया गया है। आदेश का पालन न करने पर जुर्माने की रकम बढ़ सकती है। इन सभी को यह जुर्माना सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के उल्लंघन पर सुनाई गई है, जिसमें कहा गया था कि यह अपने शो के दौरान दो दिव्यांगजनों को भी शामिल करेंगे।
दिव्यांग लोगों का बनाया मजाक
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहन ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन द्वारा जारी पेटिशन पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि समय रैना रीढ़ की एक गंभीर बीमारी के महंगे इलाज का मजाक उड़ा रहे थे। इसके अलावा इस बीमारी से पीड़ित दिव्यांग का मजाक उड़ाने का आरोप भी समय रैना पर है। याचिका में ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के मेजबान समय रैना और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर तथा निशांत जगदीश तनवर द्वारा किए गए कथित आपत्तिजनक चुटकुलों एवं टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।
याचिका में ऐसे ऑनलाइन कंटेंट के प्रसारण के लिए नियम बनाने की मांग की गई जो दिव्यांगों के के जीवन और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करता हो। नवंबर 2025 में, रैना और अन्य कॉमेडियंस को कोर्ट द्वारा निर्देश दिया गया था कि वे हर महीने कम से कम 2 इवेंट्स आयोजित करें ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के इलाज के लिए स्थापित कोष के लिए फंड इकट्ठा किया जा सके। इसके अलावा उन्हें दिव्यांग लोगों को अपने प्रोग्राम में शामिल होने के लिए भी मनाने का निर्देश दिया गया था।
यह कैसे आदर्श हैं
जुर्माने का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहाकि हमें लगता है कि कॉमेडियन समय रैना ने अदालत को गंभीरता से नहीं लिया है। उसने हमारे आदेशों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया है। समय रैना के साथ-साथ शीर्ष अदालत ने यूट्यूबर रणवीर अलाहाबादिया को भी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहाकि यह दोनों खुद को युवाओं का आदर्श समझते हैं। लेकिन मुझे समझ नहीं आता है कि यह किस तरह के यूथ आइकॉन है। वहीं, एसजी तुषार मेहता ने कहाकि हमारे युवाओं के पास इनसे बेहतर रोल मॉडल्स हैं।
कोर्ट में क्या-क्या हुआ
याचिकाकर्ता संगठन की तरफ से सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि समय रैना ने कभी भी किसी दिव्यांग व्यक्ति को शो में बुलाने के लिए संपर्क नहीं किया। वहीं, रैना के वकील ने कोर्ट को बताया कि दिव्यांग लोगों के लिए नौ लाख रुपए जुटाए गए हैं। इस पर संगठन की वकील ने कहाकि हमें उनसे कोई पैसा नहीं चाहिए। इस बेंच ने रैना के वकील से कहाकि आपको मिस अपराजिता सिंह के क्लाइंट को बुलाना चाहिए था और शो करना चाहिए था। अब आप यह संदेश दे रहे हैं कि उन्हें खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आपने उनके विकलांगता का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक भाषण के मौलिक अधिकार को दिखाने के लिए किया...तो उनके गरिमा के मौलिक अधिकार का क्या?
यह अहंकार नहीं तो क्या
बेंच ने कहाकि हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों/शपथ पत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है। यह कहकर इस कदाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है कि कल एक अनुपालन हलफनामा दायर किया गया था, जबकि वास्तव में कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया है। सीजेआई ने कहाकि वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे (अदालत के) क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। उन्होंने कहाकि अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) को ही बदलना पड़ेगा।
बेंच ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को भविष्य में अपने आचरण के प्रति सावधान रहने की हिदायत दी थी। पीठ ने निर्देश दिया था कि वे हर महीने दिव्यांगजनों की प्रेरक और सफल जीवन यात्राओं पर आधारित दो कार्यक्रम या शो करें, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों, विशेषकर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पैसे जुटाएं जा सकें।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।


