श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में किसे मानें हिंदू पक्षकार? हाईकोर्ट वापस जा सकता है मामला

भाषा, मथुरा
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में मुख्य मुकदमा तय करने के मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने के संकेत दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। पढ़ें पूरी खबर।

मथुरा जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट से हिंदू पक्ष को मिल सकती है बड़ी खबर, 2 सितंबर को अगली सुनवाई
मथुरा जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट से हिंदू पक्ष को मिल सकती है बड़ी खबर, 2 सितंबर को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संकेत दिया कि मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्षकारों की ओर से दाखिल किस वाद को मुख्य मामला मानें। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने दूसरे वादियों को नोटिस के बिना ही एक अलग मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को सभी का प्रतिनिधि मान लिया। जस्टिस संजय कुमार और ‌संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में अर्जी किसी और चीज के लिए दाखिल की गई थी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में यह तय करने से जुड़ी याचिका को वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज सकता है कि इस मामले में कौन-सा मुकदमा मुख्य वाद के रूप में सुना जाएगा।

एक को कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया?

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अन्य वादियों को नोटिस जारी नहीं किए थे बल्कि उसने एक अन्य मुकदमे में एक अन्य हिंदू पक्षकार को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया था।

पीठ ने कहा, ''यह आवेदन किसी और उद्देश्य के लिए था और सभी वादियों को नोटिस जारी नहीं किए गए। हम किसी भी स्थिति में मामले को उच्च न्यायालय वापस भेजने के इच्छुक हैं।'' शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की।

मामला फिर जाएगा हाईकोर्ट?

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि कुछ वकीलों ने अदालत में यह जानकारी दी थी कि हिंदू पक्षकारों के बीच अनौपचारिक बातचीत चल रही है कि इस विवाद में किसका मुकदमा मुख्य वाद के रूप में माना जाए। कुछ हिंदू पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत से आग्रह किया कि मामले को फिर से निर्णय के लिए उच्च न्यायालय भेज दिया जाए।

उच्चतम न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2025 के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक हिंदू पक्षकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उच्च न्यायालय ने एक अन्य मुकदमे में शामिल हिंदू पक्षकार को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना था।

शीर्ष अदालत के समक्ष मस्जिद समिति और हिंदू पक्षों की ओर से दायर कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें विभिन्न आदेशों को चुनौती दी गई है, जिनमें उच्च न्यायालय के 26 मई, 2023 के उस आदेश को दी गई चुनौती भी शामिल है, जिसके तहत मथुरा अदालत में लंबित इस विवाद से जुड़े सभी मामलों को उच्च न्यायालय ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया था।

मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग

पिछले साल 18 जुलाई को उच्च न्यायालय ने एक अन्य हिंदू पक्षकार को, जिसने मथुरा में विवादित स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग को लेकर अलग मुकदमा दायर किया था, सभी भक्तों के प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की अनुमति दी थी।

उच्च न्यायालय ने 2023 के वाद संख्या 17 के वादी की उस अर्जी को स्वीकार कर लिया था, जिसमें उसने अपने मुकदमे को विवाद से जुड़े अन्य सभी मुकदमों का प्रतिनिधि वाद मानने का अनुरोध किया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि वाद संख्या 17 को प्रतिनिधि वाद माना जाएगा और सबसे पहले इसी पर सुनवाई कर फैसला किया जाएगा।

इससे असंतुष्ट एक हिंदू पक्षकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। उसने कहा था कि विवाद से जुड़े सभी दीवानी मुकदमों को उच्च न्यायालय में ट्रांसफर किए जाने के बाद उसके मुकदमे को मुख्य वाद माना गया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने किसी अन्य पक्षकार को सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानकर त्रुटि की। यह विवाद मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल सम्राट औरंगजेब ने भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को तोड़कर वहां इस मस्जिद का निर्माण कराया था।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।
Hindi NewsIndia Newsश्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में किसे मानें हिंदू पक्षकार? HC वापस जा सकता है मामला