Supreme Court: जज को आंख दिखाना चाहते हो तो दिखाओ, हम भी देख लेंगे; CJI ने वकील को क्यों चेताया

Jan 23, 2026 01:10 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

Supreme Court: उस दौरान एडवोकेट तिवारी एक विधवा का केस लड़ रहे थे, जिनका 1 लाख 30 हजार से ज्यादा बकाया होने के कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। मामले की सुनवाई होने के बाद जस्टिस कुमार ने राज्य के बार काउंसिल अध्यक्ष से वकील के काम करने के तरीके पर संज्ञान लेने के लिए कहा।

Supreme Court: जज को आंख दिखाना चाहते हो तो दिखाओ, हम भी देख लेंगे; CJI ने वकील को क्यों चेताया

Supreme Court: हाईकोर्ट में जज के साथ कहासुनी से जुड़े मामले में फंसे वकील को सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिली है। वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ था, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने अदालत में चेतावनी दी और कहा कि अगर वह आंख दिखाना चाहते हैं, तो हम भी देख लेंगे वह क्या कर लेंगे।

मामला बीते साल 16 अक्तूबर, झारखंड हाईकोर्ट का है। एक मामले में सुनवाई के दौरान एडवोकेट महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार को सीमा पार नहीं करने के लिए कह दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ। इस नोटिस के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हें सीजेआई की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CJI ने कहा, 'वह सुप्रीम कोर्ट से आदेश सिर्फ यह दिखाने के लिए चाहते हैं कि क्या बिगाड़ लिया मेरा।' उन्होंने एडवोकेट को नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा, 'अगर वह माफी मांगना चाहते हैं, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए...। अगर वह जजों को आंख दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं। हम भी यहां बैठे हैं और फिर हम भी देख लेंगे।'

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि अगर वकील माफी मांग लेते हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति रखी जाए।

झारखंड हाईकोर्ट में क्या हुआ

उस दौरान एडवोकेट तिवारी एक विधवा का केस लड़ रहे थे, जिनका 1 लाख 30 हजार से ज्यादा बकाया होने के कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। मामले की सुनवाई होने के बाद जस्टिस कुमार ने राज्य के बार काउंसिल अध्यक्ष से वकील के काम करने के तरीके पर संज्ञान लेने के लिए कहा।

इसपर तिवारी उठे और और उंगली दिखाते हुए जज से कहा, 'मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आप जो कह रहे हैं उस तरीके से नहीं। ध्यान रखें...। किसी भी वकील को अपमानित करने की कोशिश ना करें। मैं आपको बता रहा हूं।' इसपर जज ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने अन्याय किया है। एडवोकेट ने जवाब दिया, 'क्या मैंने कहा ऐसा?' उन्होंने जज से लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करने के लिए कहा। साथ ही बताया कि वह दूसरे वकील थे, जिन्होंने उस वाक्य का इस्तेमाल किया जिसपर जज को आपत्ति हुई।

इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने वकील के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।