ज्यूडिशियल रिव्यू पर इतने हमले करने की जरूरत नहीं है, हमें भी पता हैं सीमाएं; क्यों नाराज हो गए CJI?

Apr 22, 2026 10:28 am ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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SC में 9 जजों की संवैधानिक पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। बुधवार को भी सुनवाई होनी है।

ज्यूडिशियल रिव्यू पर इतने हमले करने की जरूरत नहीं है, हमें भी पता हैं सीमाएं; क्यों नाराज हो गए CJI?

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मंगलवार को इस केस पर चल रही सुनवाई के दौरान 9 जजों की संवैधानिक पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की है। CJI ने कहा है कि कोर्ट धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं को समझता है और इस शक्ति पर बार-बार सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति पर सीमाओं के बावजूद, वह इस बात की पड़ताल कर सकता है कि क्या सरकार सामाजिक कल्याण या सुधार के नाम पर किसी धार्मिक परंपरा या रीति-रिवाज पर प्रतिबंध लगा सकती है।

धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए दी गई दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की SC की शक्ति पर कुछ सीमाएं हैं, लेकिन यह कहना कि इस संबंध में कोई अधिकार नहीं है, इसे स्वीकार करना मुश्किल होगा।

जे साई दीपक की दलीलों पर बोले CJI

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। पीठ ने ये टिप्पणियां वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक की दलीलों पर कीं, जो पंडालम शाही परिवार और ऐतिहासिक श्रीउर मठ की ओर से अदालत में पेश हुए थे।

SC में यह दलील दी गई कि अगर कोई धार्मिक परंपरा अपने पवित्र स्वरूप के कारण स्वाभाविक रूप से कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, तो सरकार द्वारा किसी कानून के माध्यम से उस परंपरा को मान्यता देने मात्र से न्यायपालिका को उसकी समीक्षा करने की शक्ति अचानक प्राप्त नहीं हो जाती। इस पर जवाब देते हुए CJI ने कहा, “अगर सरकार सामाजिक कल्याण के नाम पर किसी धार्मिक परंपरा पर प्रतिबंध लगाती है, तो इसकी पड़ताल कौन करेगा? हमारा मानना है कि कुछ सीमाएं हैं, लेकिन यह कहना कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति बिल्कुल नहीं है, यह बात स्वीकार करना बहुत कठिन हो सकता है। न्यायिक समीक्षा की शक्ति पर इतना हमला करने की कोई आवश्यकता नहीं है।''

पुजारियों की तरफ से दलील

जे साई दीपक अदालत में चेतना कन्साइंस ऑफ वुमन, भगवान अय्यप्पा मंदिरों के अखिल भारतीय संगठन, साथ ही श्री पद्मनाभस्वामी और चिलकुर बालाजी मंदिरों के मुख्य पुजारियों जैसे विभिन्न अन्य हिंदू संगठनों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो काम सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता, वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता। वकील ने पीठ से कहा कि किसी कानून का इस्तेमाल अदालतों द्वारा सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं की ''तर्कसंगतता'' का परीक्षण करने के लिए पिछले दरवाजे के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

बुधवार को भी होगी सुनवाई

गौरतलब है कि 9 जजों की संवैधानिक पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न आस्थाओं को मानने वाले लोगों द्वारा पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और सीमा से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। मंगलवार को सुनवाई का छठा दिन था। बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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