तमिलनाडु के पूर्व मंत्री को SC से राहत, गिरफ्तारी पर रोक मगर जमा करना होगा पासपोर्ट; क्या मामला
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जज जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अगर बालाजी जांच में पूरा सहयोग करेंगे तो उनकी गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी। अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी के पास जमा करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके नेता और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को शुक्रवार को बड़ी राहत दी। अदालत ने उनके खिलाफ साल 2026 की एफआईआर संख्या-05 की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस तरह वह फिलहाल गिरफ्तारी से बच गए हैं। बालाजी के खिलाफ यह FIR तमिलनाडु राज्य विपणन निगम घोटाले से जुड़ी है। एससी ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर बालाजी की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जज जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अगर बालाजी जांच में पूरा सहयोग करेंगे तो उनकी गिरफ्तारी पर रोक जारी रहेगी। अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी के पास जमा करने और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करने का भी निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस को ED के हलफनामे के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज करने के बजाय पहले जांच नहीं करनी चाहिए थी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में लगाए गए अधिकांश आरोप वर्ष 2020 व 2021 की अवधि से जुड़े हैं और वर्तमान में सेंथिल बालाजी मंत्री पद पर नहीं हैं। पीठ ने कहा कि अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में उनके खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो उन्हें उसके नतीजे भुगतने होंगे। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से मुक्त होकर की जानी चाहिए।
तमिलनाडु सरकार ने राहत देने का किया विरोध
तमिलनाडु सरकार और अभियोजन पक्ष ने बालाजी को राहत दिए जाने का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि मंत्री पद छोड़ने के बावजूद उनका प्रभाव अब भी बना हुआ है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि 2021 से 2025 तक सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने अपने खिलाफ शिकायतों को आगे नहीं बढ़ने दिया। यह भी कहा गया कि अगर उन्हें संरक्षण दिया गया तो सबूतों के प्रभावित होने या नष्ट होने की आशंका है। इसके अलावा उनके खिलाफ पहले से कई गंभीर मामले दर्ज होने का हवाला भी दिया गया।
इस पर जज जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत उचित शर्तें लगाकर इन आशंकाओं का समाधान कर सकती है। यह भी सुनिश्चित होगा कि बालाजी जांच में शामिल हों, फरार न हों और जांच को प्रभावित न करें। सेंथिल बालाजी की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने अदालत में पक्ष रखते हुए किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण देने की मांग की। उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के अग्रिम जमानत खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि मामले में उन्हें न्यायिक संरक्षण मिलना चाहिए।


